योगी सरकार का 1 बड़ा फैसला: यूपी के सभी 75 जिलों में लागू

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में योगी सरकार ने एक अहम निर्णय लिया है। 1 अप्रैल से राज्यभर में अंडों की बिक्री और सप्लाई को लेकर नया नियम लागू कर दिया गया है। इस व्यवस्था के तहत अब हर अंडे पर उसकी उत्पादन तिथि और उपयोग की अंतिम तारीख अंकित करना अनिवार्य कर दिया गया है।

उपभोक्ताओं को मिलेगी पारदर्शी जानकारी

अब तक बाजार में खुले तौर पर बिकने वाले अंडों की ताजगी को लेकर कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी। ग्राहक यह नहीं जान पाते थे कि अंडा कितना पुराना है। नए नियम के लागू होने के बाद उपभोक्ता सीधे अंडे पर लिखी तारीख देखकर उसकी गुणवत्ता का अंदाजा लगा सकेंगे। इससे खराब या बासी अंडे खरीदने की समस्या काफी हद तक खत्म होगी।

सप्लाई चेन में आएगा बदलाव

यह नियम केवल दुकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि अंडों के पूरे वितरण तंत्र पर लागू होगा। उत्पादन केंद्रों से लेकर थोक बाजार और खुदरा विक्रेताओं तक सभी को इसका पालन करना होगा। इससे अंडों के भंडारण और परिवहन की प्रक्रिया में भी सुधार देखने को मिलेगा।

स्टोरेज के अनुसार तय होगी उपयोग अवधि

सरकार ने अंडों के उपयोग की समय-सीमा भी स्पष्ट की है। सामान्य तापमान (लगभग 30 डिग्री सेल्सियस) में रखे अंडों को दो सप्ताह के भीतर उपयोग करना होगा। वहीं, यदि अंडों को ठंडे तापमान (2 से 8 डिग्री सेल्सियस) में रखा जाता है, तो उनकी उपयोग अवधि पांच सप्ताह तक मानी जाएगी।

रंगों से होगी पहचान आसान

अंडों पर लगने वाली मुहर फूड ग्रेड स्याही से की जाएगी, जिससे स्वास्थ्य पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अलग-अलग परिस्थितियों के लिए अलग रंग निर्धारित किए गए हैं। सामान्य तापमान वाले अंडों पर गुलाबी रंग और कोल्ड स्टोरेज में रखे अंडों पर नीले रंग की मुहर होगी। इससे ग्राहक एक नजर में अंडे के स्टोरेज की स्थिति समझ सकेंगे।

बिना मुहर के अंडे होंगे अस्वीकार्य

यदि किसी अंडे पर निर्धारित जानकारी अंकित नहीं होगी, तो उसे खाने योग्य नहीं माना जाएगा। ऐसे अंडों को बाजार से हटाकर नष्ट किया जाएगा। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित हो सके और उपभोक्ताओं की सेहत से कोई समझौता न हो।

खाद्य सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम

सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि खाद्य सुरक्षा मानकों को भी मजबूती मिलेगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस नियम की नियमित निगरानी करें और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें।

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