आयात और घरेलू राजस्व ने बनाया रिकॉर्ड
इस शानदार वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान आयात से होने वाले GST संग्रह का रहा, जिसमें पिछले साल की तुलना में लगभग 18 प्रतिशत का उछाल देखा गया। वहीं घरेलू कारोबार से प्राप्त राजस्व भी 6 प्रतिशत से अधिक बढ़ा, जो देश की बढ़ती खपत और उद्योगों की मजबूती को दर्शाता है। अगर रिफंड को हटा कर शुद्ध GST की बात करें, तो मार्च में यह ₹1,77,990 करोड़ तक पहुंच गया।
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की तस्वीर
पूरे वित्त वर्ष में GST का कुल संग्रह ₹22.27 लाख करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 8.3 प्रतिशत अधिक है। शुद्ध संग्रह की वृद्धि 7.1 प्रतिशत रही और यह भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति का परिचायक बनती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह आंकड़ा देश की 7 प्रतिशत के आस-पास GDP विकास दर के अनुरूप है।
रिफंड और प्रक्रिया में सुधार
मार्च में रिफंड में भी तेजी देखी गई और यह ₹22,074 करोड़ तक पहुंचा। घरेलू रिफंड में 31 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई, जो सरकार की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और समयबद्धता का संकेत है। हालांकि, सेस में मामूली गिरावट दर्ज की गई, जो रिफंड और एडजस्टमेंट के कारण हुई।
आर्थिक विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि आयात से संग्रह में हुई तेजी यह दर्शाती है कि वैश्विक व्यापार की अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के निर्यात-आधारित कारोबार मजबूत बने हुए हैं। वहीं घरेलू राजस्व में वृद्धि बढ़ती खपत और कर अनुपालन की ओर इशारा करती है।

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