यह कदम विशेष रूप से प्लास्टिक, पैकेजिंग, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल और ऑटोमोटिव उद्योगों के लिए फायदेमंद साबित होगा। सरकार का मानना है कि उत्पादन लागत में कमी का असर सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा। इससे प्लास्टिक के उत्पाद, कपड़े, दवाएं और वाहन जैसे सामान सस्ते या स्थिर मूल्य पर उपलब्ध हो सकते हैं।
शामिल उत्पाद
इस राहत में ऐसे रसायन और केमिकल्स शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल उद्योग कच्चे माल या मिड-स्टेप के रूप में करते हैं। इनमें एनहाइड्रस अमोनिया, टोल्यून, स्टाइरीन, डाइक्लोरोमीथेन, विनाइल क्लोराइड मोनोमर, मेथनॉल, मोनोएथिलीन ग्लाइकोल, फिनोल, एसिटिक एसिड, विनाइल एसीटेट मोनोमर, प्यूरीफाइड टेरेफ्थैलिक एसिड (PTA), एपॉक्सी रेजिन, फॉर्मल्डिहाइड और मेलामाइन-फॉर्मल्डिहाइड शामिल हैं।
उद्योगों को मिलेगा फायदा
प्लास्टिक और पैकेजिंग: कच्चे माल की लागत घटने से उत्पादन बढ़ेगा और कीमतों में स्थिरता आएगी।
फार्मास्यूटिकल्स: दवाओं के निर्माण में लागत कम होने से दवाओं की कीमतों पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
टेक्सटाइल: कपड़े और सिंथेटिक फाइबर बनाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स सस्ते होंगे।
ऑटोमोटिव पार्ट्स: कार और बाइक के प्लास्टिक और रबर पार्ट्स की उत्पादन लागत घटेगी।
अन्य मैन्युफैक्चरिंग: औद्योगिक रसायन बनाने वाली इकाइयों को भी लाभ मिलेगा।

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