रिपोर्ट के मुताबिक एक तरफ उत्तर बंगाल में बीजेपी मजबूत होती दिख रही है, तो दूसरी तरफ दक्षिण और शहरी इलाकों में टीएमसी अपनी पकड़ बनाए हुए है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के सामने इस बार सत्ता बचाने की चुनौती है, जबकि बीजेपी पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में उतरती दिखाई दे रही है।
294 सीटों का पूरा गणित
ओपिनियन पोल के मुताबिक कुल 294 सीटों में मुकाबला कुछ इस तरह बनता दिख रहा है:
टीएमसी: 165 से 182 सीटें
बीजेपी: 104 से 119 सीटें
लेफ्ट+कांग्रेस: 5 से 10 सीटें
यानी टीएमसी बहुमत (148) के आंकड़े को पार करती दिख रही है, लेकिन 2021 के मुकाबले सीटों में गिरावट संभव है। जबकि बीजेपी पहली बार 100 सीटों के पार जाती नजर आ रही है, जो उसके लिए बड़ा उछाल होगा। कई सीटों पर मुकाबला कांटे के टक्कर का दिख रहा हैं।
जोन-वाइज सियासी तस्वीर
1. उत्तर बंगाल: बीजेपी का मजबूत किला
मालदा, कूचबिहार, अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी जैसे इलाकों में बीजेपी की पकड़ मजबूत होती दिख रही है। यहां बीजेपी 38–41 सीटें जीत सकती हैं, जबकि टीएमसी 12–15 सीटें। यहां चाय बागान मजदूरों की नाराजगी और स्थानीय समुदायों का समर्थन बीजेपी को फायदा पहुंचा रहा है।
2. दक्षिण बंगाल और कोलकाता: टीएमसी का दबदबा
कोलकाता, दक्षिण 24 परगना और हावड़ा जैसे क्षेत्रों में टीएमसी का प्रभाव कायम है। दक्षिण 24 परगना की 31 में से लगभग 30 सीटें टीएमसी को, कोलकाता की 11/11 सीटों पर बढ़त मिलता दिख रहा हैं। यहां शहरी वोटर विकास और क्षेत्रीय पहचान के मुद्दों पर टीएमसी के साथ खड़ा दिख रहा है।
3. जंगलमहल: बीजेपी और टीएमसी में कांटे की टक्कर
बांकुरा, पुरुलिया और झाड़ग्राम जैसे आदिवासी इलाकों में मुकाबला बेहद करीबी है। बीजेपी को 20–24 सीटें, जबकि टीएमसी को 18–22 सीटें मिलती दिख रही हैं। यहां भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
4. सेंट्रल बंगाल: लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन कुछ हद तक प्रभाव
नादिया, मुर्शिदाबाद और मालदा में लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन कुछ हद तक प्रभाव डाल सकता है। यहां टीएमसी 25–28 सीटें, बीजेपी 15–18 सीटें, जबकि लेफ्ट+कांग्रेस: 4–6 सीटें जीत सकती हैं। यहां अल्पसंख्यक वोटों का बंटवारा चुनावी समीकरण बदल सकता है।
क्या कहता है पूरा चुनावी ट्रेंड?
टीएमसी अब भी सबसे आगे, लेकिन पहले जितनी मजबूत नहीं
बीजेपी का तेजी से बढ़ता ग्राफ, जीत के करीब ले जा सकता हैं
स्थानीय मुद्दे—भ्रष्टाचार, रोजगार और कल्याणकारी योजनाएं—निर्णायक भूमिका में।
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