आधिकारिक नतीजे भले ही 4 मई को सामने आएंगे, लेकिन उससे पहले आए एक ताजा ओपिनियन पोल ने सियासी बहस को और गर्म कर दिया है। सर्वे के मुताबिक राज्य में मौजूदा सत्ता पक्ष को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है, जबकि विपक्ष को अपेक्षित समर्थन मिलता नजर नहीं आ रहा।
सर्वे में किसे कितनी बढ़त?
ओपिनियन पोल के अनुसार, 126 सीटों वाली विधानसभा में सत्ताधारी दल भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलने का अनुमान है। आंकड़े बताते हैं कि पार्टी अकेले ही बहुमत के आंकड़े को पार कर सकती है। वहीं मुख्य विपक्षी दल सीटों के मामले में काफी पीछे दिख रहा है, जिससे उसके लिए सरकार बनाने की राह मुश्किल नजर आती है।
गठबंधन की भूमिका भी अहम
सर्वे में यह भी संकेत है कि सत्ताधारी गठबंधन को सहयोगी दलों का अच्छा समर्थन मिल सकता है। यदि ये अनुमान सही साबित होते हैं, तो गठबंधन की कुल सीटें काफी मजबूत स्थिति में पहुंच सकती हैं। इसके विपरीत, अन्य छोटे दलों और क्षेत्रीय पार्टियों का प्रभाव सीमित रहने की संभावना जताई जा रही है।
वोट प्रतिशत में कांटे की टक्कर
हालांकि सीटों के अनुमान में बड़ा अंतर दिख रहा है, लेकिन वोट शेयर के मामले में मुकाबला अपेक्षाकृत करीब नजर आता है। सर्वे के मुताबिक दोनों प्रमुख दलों के बीच वोट प्रतिशत का अंतर बहुत ज्यादा नहीं है, जो इस चुनाव को और दिलचस्प बनाता है।
पिछले चुनाव से क्या बदलेगा समीकरण?
पिछले विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी गठबंधन ने बहुमत हासिल कर सरकार बनाई थी। इस बार के सर्वे में संकेत मिल रहे हैं कि भाजपा अपनी स्थिति और मजबूत कर सकती है। वहीं विपक्ष के लिए यह चुनाव अपनी पकड़ मजबूत करने की चुनौती लेकर आया है।
हालांकि ओपिनियन पोल चुनावी रुझानों की एक झलक जरूर देते हैं, लेकिन वास्तविक तस्वीर मतदान के बाद ही साफ होगी। 9 अप्रैल को होने वाले मतदान में जनता का फैसला ही तय करेगा कि असम में ‘कमल’ फिर खिलेगा या ‘पंजा’ कोई बड़ा कमाल दिखाएगा।
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