भारत की तेज़ी और टेक-सेवी वर्कफोर्स
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की टेक-सेवी वर्कफोर्स देश की आर्थिक ग्रोथ को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में मदद कर रही है। भारत में हाल ही में आयोजित इंडिया एआई इंपैक्ट समिट ने भी देश में एआई को अपनाने के महत्व को रेखांकित किया।
आपको बता दें की मार्च 2024 में इंडिया एआई मिशन को मंजूरी दी गई थी, जिसका कुल बजट ₹10,371.92 करोड़ रुपये रखा गया है। इस मिशन के तहत विशेष रूप से छोटी और मझोली कंपनियों को एआई अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
टॉप 10 देशों की स्थिति
BCG की रिपोर्ट में एआई एडॉप्शन के शीर्ष देशों की सूची इस प्रकार है:
भारत – 92%
स्पेन – 78%
ब्राजील – 76%
साउथ अफ्रीका – 72%
यूके – 68%
इटली – 68%
जर्मनी – 67%
फ्रांस – 64%
अमेरिका – 64%
जापान – 51%
इस लिस्ट से स्पष्ट होता है कि यूरोप और अमेरिका के बड़े देशों को भी भारत की गति को पकड़ना मुश्किल हो रहा है। चीन, जो तकनीकी क्षेत्र में हमेशा अग्रणी माना जाता है, इस रेस में टॉप 10 में शामिल नहीं है। वहीं, इजरायल जैसी इनोवेशन में अग्रणी अर्थव्यवस्था भी टॉप 10 में नहीं है।
भविष्य की संभावनाएँ
जानकारों का कहना है कि भारत की यह एआई रफ्तार केवल तकनीकी विकास तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि औद्योगिक और आर्थिक क्षेत्र में भी बदलाव लाएगी। नई तकनीकें, स्मार्ट सॉल्यूशंस और डेटा-संचालित निर्णय लेने की क्षमता भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा में सबसे आगे रख सकती है।
सरकार की योजनाएं और निवेश अब छोटे व्यवसायों और स्टार्टअप्स तक भी फैल रहे हैं, जिससे देश में एआई इकोसिस्टम मजबूत हो रहा है। इससे आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक एआई नेतृत्व में अपनी पकड़ और मजबूत कर सकता है।

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