सैलरी बढ़ोतरी का मुख्य आधार बनेगा फिटमेंट फैक्टर
वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर सबसे अहम भूमिका निभाता है। 7वें वेतन आयोग में यह 2.57 तय किया गया था, जिसके आधार पर कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी हुई थी। इस बार इसे 1.92 से लेकर 2.86 तक रखने की मांग उठ रही है। यदि यह मांग मान ली जाती है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव है।
न्यूनतम वेतन में बड़ा उछाल संभव
वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 है। नए वेतन आयोग के लागू होने के बाद इसे बढ़ाकर ₹25,000-₹54,000 तक जा सकता है । इससे निचले स्तर के कर्मचारियों को सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है।
वेतन और पेंशन में 30% तक बढ़ोतरी
अनुमानों के अनुसार, 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने के बाद कर्मचारियों की कुल सैलरी और पेंशन में 30 से 34 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। इससे न सिर्फ कर्मचारियों की आय बढ़ेगी, बल्कि उनकी खरीदारी क्षमता भी मजबूत होगी।
महंगाई भत्ते का होगा बेसिक में विलय
हर नए वेतन आयोग के लागू होने पर महंगाई भत्ता (DA) को मूल वेतन में जोड़ दिया जाता है और फिर DA की गणना शून्य से शुरू होती है। इस बार भी यही प्रक्रिया अपनाई जा सकती है, जिससे नई सैलरी संरचना तैयार होगी।
आयोग की प्रक्रिया और ताजा अपडेट
अप्रैल 2026 तक आयोग ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से सुझाव लेने के लिए प्रश्नावली जारी की थी, जिसकी अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 तय की गई थी। इसके अलावा आयोग की टीम 24 अप्रैल को देहरादून में विभिन्न पक्षों से चर्चा करने वाली है, जिससे रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में मदद मिलेगी।
एरियर को लेकर भी उम्मीदें कायम
अगर आयोग की सिफारिशें लागू होने में देरी होती है, तो भी कर्मचारियों को निराश होने की जरूरत नहीं है। संभावना है कि लागू होने की तारीख 1 जनवरी 2026 से ही मानी जाएगी और देरी की स्थिति में बकाया राशि (एरियर) एकमुश्त दी जा सकती है।

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