हर गांव में लगेगा कैंप, किसानों का होगा पंजीकरण
सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी गांवों में प्राथमिकता के आधार पर शिविर लगाए जाएं। इन कैंपों में किसानों का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा और उन्हें नई डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी पात्र किसान योजना के लाभ से वंचित न रहे।
एक पहचान से मिलेंगे सभी लाभ
फार्मर रजिस्ट्री को एक ऐसी प्रणाली के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें कृषि विभाग और अन्य संबंधित विभागों की योजनाएं आपस में जुड़ी होंगी। इसका फायदा यह होगा कि किसान को अलग-अलग योजनाओं के लिए बार-बार आवेदन नहीं करना पड़ेगा, बल्कि एक ही पहचान के आधार पर सभी लाभ मिल सकेंगे।
आधार लिंक से सुधरेंगी त्रुटियां
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन किसानों के नाम या रिकॉर्ड में त्रुटियां हैं, उन्हें आधार से जोड़कर जल्द ठीक किया जाएगा। खासतौर पर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और फसल बीमा जैसी योजनाओं में डेटा की सटीकता सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही हर किसान का ‘किसान पहचान पत्र’ बनवाने पर जोर दिया गया है।
तय समयसीमा में पूरी होगी तैयारी
राज्य सरकार ने इस पूरी व्यवस्था को समयबद्ध तरीके से लागू करने का लक्ष्य रखा है। कृषि विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह अपनी सभी योजनाओं को इस सिस्टम से जोड़ते हुए पोर्टल को 1 मई 2026 तक पूरी तरह चालू करे। वहीं अन्य विभागों जैसे उद्यान, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता और लघु सिंचाई को 31 मई 2026 तक अपनी तैयारियां पूरी करनी होंगी।
खत्म होंगी जटिलताएं, बढ़ेगी पारदर्शिता
इस नई व्यवस्था से किसानों को योजनाओं का लाभ पाने में होने वाली दिक्कतें कम होंगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा सकेगा कि किसी एक व्यक्ति को बार-बार लाभ न मिले और संसाधनों का सही वितरण हो। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस पूरे अभियान की नियमित निगरानी की जाए और तय समय में इसे पूरा किया जाए। इससे योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पारदर्शी तरीके से पहुंच सकेगा।

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