कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर: 1 अप्रैल से बदल गए ग्रेच्युटी के नियम

नई दिल्ली। नए वित्तीय साल की शुरुआत के साथ ही कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की गणना और पात्रता के नियम बदल गए हैं। 1 अप्रैल 2026 से लागू हुए नए लेबर कोड्स के अनुसार अब कर्मचारियों को पहले से कहीं ज्यादा ग्रेच्युटी मिल सकती है।

नए ग्रेच्युटी नियमों में क्या बदलाव है?

पुराने नियमों में ग्रेच्युटी की गणना केवल बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) के आधार पर होती थी। नए नियमों के अनुसार अब रिटेनिंग अलाउंस भी शामिल होगा और वेतन का यह हिस्सा कुल CTC का कम से कम 50 प्रतिशत होना अनिवार्य है।

इसका मतलब यह है कि कंपनियां अब ग्रेच्युटी के आधार के लिए बेसिक सैलरी को कम नहीं रख पाएंगी। उदाहरण के लिए, अगर पहले किसी कर्मचारी की ग्रेच्युटी 1.44 लाख रुपए थी, तो नए नियमों के अनुसार यह बढ़कर लगभग 2 लाख रुपए या उससे अधिक हो सकती है।

टेक-होम सैलरी और PF पर असर

बढ़ी हुई बेसिक सैलरी का असर कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी और PF योगदान पर भी पड़ेगा। चूंकि PF की गणना बेसिक सैलरी पर होती है, इसलिए PF योगदान बढ़ने से मासिक हाथ में आने वाली सैलरी में थोड़ी कमी आ सकती है। लेकिन लंबे समय में यह बदलाव कर्मचारियों के रिटायरमेंट बेनिफिट्स को मजबूत करेगा।

ग्रेच्युटी के लिए पात्रता

नए Code on Social Security 2020 के अनुसार अब फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को भी ग्रेच्युटी का लाभ मिलने लगा है। जहां नियमित कर्मचारियों को ग्रेच्युटी के लिए 5 साल की सेवा पूरी करनी होती थी, वहीं फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को केवल 1 साल की सेवा पूरी होने पर प्रोराटा आधार पर ग्रेच्युटी मिलेगी। इसके अलावा, अंतिम वर्ष में यदि कोई कर्मचारी 6 महीने से अधिक काम करता है, तो उसे पूरे एक वर्ष की सेवा माना जाएगा। इससे कर्मचारियों को ग्रेच्युटी पाने में आसानी होगी।

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