8वां वेतन आयोग: फिटमेंट फैक्टर से लेकर ओल्ड पेंशन स्कीम तक!

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो चुकी हैं। खासकर तब जब आयोग हितधारकों से सुझाव मांगना शुरू कर दिया है। 24 अप्रैल 2026 को आयोग की टीम देहरादून का दौरा करेगी, जहाँ वे कर्मचारी संगठनों और यूनियनों के साथ सीधी बातचीत करेंगे।  इस बैठक में वेतन ढांचे से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विचार होने की संभावना है।

फिटमेंट फैक्टर बना सबसे बड़ा मुद्दा

इस बार फिटमेंट फैक्टर को लेकर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है। कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि इसे मौजूदा स्तर से बढ़ाकर 3.35 तक किया जाए। अगर सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो बेसिक सैलरी में उल्लेखनीय उछाल देखने को मिल सकता है। साथ ही ‘फैमिली यूनिट’ की परिभाषा को भी बड़ा करने की बात कही जा रही है, जिससे वेतन निर्धारण में कर्मचारियों को अधिक लाभ मिल सके।

महंगाई के बीच वेतन बढ़ोतरी की मांग

बढ़ती महंगाई को देखते हुए कर्मचारी यूनियनें न्यूनतम वेतन में भारी वृद्धि की उम्मीद कर रही हैं। उनका मानना है कि मौजूदा सैलरी स्ट्रक्चर अब समय के अनुरूप नहीं रह गया है, इसलिए इसमें व्यापक बदलाव जरूरी है। यदि प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं, तो कर्मचारियों की आय में बड़ा सुधार संभव है।

स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी बड़ी मांग

जहां CGHS की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां कर्मचारियों के लिए मेडिकल अलाउंस में भारी बढ़ोतरी की मांग की जा रही है। मौजूदा भत्ते को पर्याप्त नहीं मानते हुए इसे काफी बढ़ाने की जरूरत बताई जा रही है, ताकि इलाज का खर्च आसानी से उठाया जा सके।

OPS बनाम NPS: फिर गरमाया पेंशन मुद्दा

पेंशन को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। कई कर्मचारी संगठन नई पेंशन प्रणाली (NPS) और हाल की व्यवस्थाओं को हटाकर पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि OPS से रिटायरमेंट के बाद वित्तीय सुरक्षा ज्यादा मजबूत रहती है।

करियर ग्रोथ और अन्य सुविधाओं पर जोर

कर्मचारी संगठनों ने करियर प्रोग्रेशन को लेकर भी स्पष्ट मांग रखी है। वे चाहते हैं कि पूरी सेवा अवधि में निश्चित संख्या में प्रमोशन सुनिश्चित किए जाएं। इसके अलावा लीव ट्रैवल कंसेशन (LTC) को कैश में देने की सुविधा जैसे विकल्प भी चर्चा में हैं।

सालाना इंक्रीमेंट और रिटायरमेंट पर फोकस

वेतन वृद्धि के साथ-साथ कर्मचारी सालाना इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 7% करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा रिटायरमेंट से जुड़े लाभों में भी बदलाव की मांग उठी है। लीव एनकैशमेंट की सीमा बढ़ाने और मेडिकल सुविधाओं में सुधार जैसे प्रस्ताव कर्मचारियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में अहम माने जा रहे हैं।

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