सोने की कीमतों का बुरा दौर: 17 साल में पहली बार 13% से अधिक मंथली गिरावट

नई दिल्ली। सोने के निवेशकों के लिए मार्च 2026 एक चुनौतीपूर्ण महीना रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में मंगलवार, 31 मार्च को हल्की तेजी दर्ज की गई, लेकिन इसके बावजूद यह कीमती धातु पिछले 17 साल की सबसे बड़ी मंथली गिरावट की ओर बढ़ रही है।

अमेरिकी आर्थिक नीतियों का असर

सोने में कमजोरी की मुख्य वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों में बदलाव की उम्मीदों में कमी है। बाजार अब मान रहा है कि इस साल अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती संभव नहीं है। ब्याज दरों में स्थिरता सोने जैसे बिना ब्याज वाले एसेट के लिए नकारात्मक साबित हो रही है। फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने संकेत दिए हैं कि केंद्रीय बैंक कोई जल्दी फैसला नहीं करेगा और पहले ईरान युद्ध और ऊर्जा कीमतों के प्रभाव का विश्लेषण करेगा।

ऊर्जा कीमतों का दबाव

पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने वैश्विक महंगाई के खतरे को बढ़ाया है। ऊंची महंगाई के कारण ब्याज दरों को बनाए रखने की संभावना बढ़ गई, जो सोने की चमक को कमजोर कर रही है। जिससे इसकी कीमतें लगातार गिर रही हैं।

डॉलर और वैश्विक बाजार का प्रभाव

डॉलर में कमजोरी से सोने को कुछ सहारा मिला क्योंकि दूसरे देशों के निवेशकों के लिए यह सस्ता हो गया। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीदों और ट्रंप के बयान जिनमें उन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान समाप्त करने की संभावना जताई से बाजार में थोड़ी राहत मिली।

सोने और अन्य कीमती धातुओं की स्थिति

मंगलवार को स्पॉट गोल्ड 4,578.89 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 4,611.30 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहे थे। हालांकि, महीने भर की गिरावट 13% से अधिक हो चुकी है, जो अक्टूबर 2008 के बाद सबसे बड़ी मासिक गिरावट के रूप में दर्ज की जा सकती है।

साथ ही, दूसरे कीमती धातुओं में भी मजबूती रही:

सिल्वर में 3.3% की तेजी, 72.27 डॉलर प्रति औंस

प्लेटिनम लगभग 1% बढ़कर 1,916.77 डॉलर

पैलेडियम 2.3% बढ़कर 1,437.76 डॉलर

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