12,500 करोड़ की चार बड़ी परियोजनाएं
सरकार इस योजना के तहत करीब 12,500 करोड़ रुपये खर्च करके चार प्रमुख पाइपलाइन प्रोजेक्ट विकसित करने जा रही है। इन पाइपलाइनों की कुल लंबाई लगभग 2,500 किलोमीटर होगी। ये नेटवर्क देश के अलग-अलग रिफाइनरी, बंदरगाह और बॉटलिंग प्लांट्स को आपस में जोड़ेंगे। इससे एलपीजी की सप्लाई एक जगह से दूसरी जगह तक बिना रुकावट और ज्यादा तेज गति से हो सकेगी।
किन-किन रूट पर बनेगी पाइपलाइन
इस योजना में चार अहम रूट शामिल किए गए हैं:
1 .चेरलापल्ली से नागपुर
2 .शिक्रापुर से हुबली होते हुए गोवा
3 .पारादीप से रायपुर
4 .झांसी से सितारगंज
इन रूट्स के जरिए देश के कई हिस्सों में गैस की उपलब्धता बेहतर होगी।
सड़क परिवहन पर दबाव घटेगा
अभी तक एलपीजी की सप्लाई का बड़ा हिस्सा टैंकरों के जरिए सड़क मार्ग से होता है। इससे समय भी ज्यादा लगता है और हादसों का खतरा भी बना रहता है। नई पाइपलाइन व्यवस्था आने के बाद टैंकरों पर निर्भरता काफी कम हो जाएगी। इससे न केवल सप्लाई तेज होगी बल्कि सड़क यातायात और ईंधन खर्च में भी कमी आएगी।
जरूरत के समय मददगार साबित होगी व्यवस्था
इन पाइपलाइनों को सिर्फ ट्रांसपोर्ट सिस्टम नहीं बल्कि एक तरह का बैकअप स्टोरेज सिस्टम भी बनाया जा रहा है। अगर किसी इलाके में अचानक गैस की मांग बढ़ जाती है या सप्लाई में रुकावट आती है, तो यह नेटवर्क तुरंत मदद करेगा। टैंकरों की संख्या कम होने से डीजल की खपत घटेगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी। इस तरह यह योजना पर्यावरण के लिहाज से भी सकारात्मक मानी जा रही है।
बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार का जरूरी कदम
देश में घरेलू और व्यावसायिक दोनों स्तर पर एलपीजी की मांग लगातार बढ़ रही है। उज्ज्वला योजना के बाद ग्रामीण इलाकों में भी गैस की पहुंच काफी बढ़ी है। ऐसे में सप्लाई सिस्टम को मजबूत करना अब जरूरी हो गया है।

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