बिहार में शुरू हुई नई पहल: पशुपालकों के लिए खुशखबरी

पटना। बिहार में पशुपालन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक पहल की शुरुआत हुई है, जो आने वाले समय में डेयरी सेक्टर की तस्वीर बदल सकती है। Bihar Animal Sciences University के वैज्ञानिकों ने भैंसों में आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) तकनीक लागू करने की दिशा में काम शुरू किया है। इस कदम से उन्नत नस्ल के पशु तैयार करने और दूध उत्पादन बढ़ाने की नई संभावनाएं खुली हैं।

मुर्रा नस्ल पर फोकस, 12 भैंसों पर प्रयोग

वैज्ञानिकों की टीम ने शुरुआती चरण में 12 भैंसों पर IVF तकनीक का प्रयोग शुरू किया है। इसके लिए खासतौर पर मुर्रा नस्ल को चुना गया है, जो अधिक दूध उत्पादन के लिए जानी जाती है। इन भैंसों की देखभाल विश्वविद्यालय के पशुधन केंद्र में की जा रही है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो इसे बड़े स्तर पर लागू कर किसानों तक पहुंचाया जाएगा।

क्या है IVF तकनीक?

IVF यानी In Vitro Fertilization एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें चुनी हुई भैंस (डोनर) से अंडाणु लिया जाता है, प्रयोगशाला में उसका निषेचन कराया जाता है और तैयार भ्रूण को दूसरी स्वस्थ भैंस में प्रत्यारोपित किया जाता है। इस प्रक्रिया से बेहतर नस्ल और ज्यादा दूध देने वाले पशु तैयार किए जा सकते हैं। यही वजह है कि इसे पशुपालन में क्रांतिकारी तकनीक माना जा रहा है।

किसानों के लिए बड़ा अवसर

विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी। उन्नत नस्ल के पशु मिलने से दूध उत्पादन बढ़ेगा, पशुओं की गुणवत्ता सुधरेगी, डेयरी व्यवसाय अधिक लाभकारी बनेगा। सबसे खास बात यह है कि फिलहाल यह सुविधा किसानों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे छोटे और मध्यम पशुपालक भी इसका लाभ उठा सकें।

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