यह कदम अगर आगे बढ़ता है तो बिहार के छोटे शहरों के लोगों के लिए हवाई यात्रा पहली बार आसान और सुलभ हो सकती है। इस योजना का एक बड़ा फायदा यह होगा कि पटना एयरपोर्ट पर भीड़ कम होगी और राज्य के अलग-अलग हिस्सों को सीधे हवाई कनेक्शन मिल सकेगा। साथ ही, व्यापार, शिक्षा और रोजगार के नए अवसर भी खुलने की उम्मीद है।
AAI टीम करेगी जमीन पर जांच
AAI की टीम 15 से 18 अप्रैल के बीच इन सभी जगहों पर जाकर वास्तविक स्थिति का आकलन करेगी। यह सिर्फ कागजी योजना नहीं होगी, बल्कि जमीन पर उतरकर देखा जाएगा कि एयरपोर्ट बनाना या शुरू करना कितना संभव है। टीम रनवे की लंबाई, जमीन की उपलब्धता, आसपास की सुरक्षा और उड़ान संचालन की तकनीकी जरूरतों की जांच करेगी।
कहां कितनी तैयारी है?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार गोपालगंज में रनवे अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में है, जबकि बाकी तीन शहरों भागलपुर, मोतिहारी और छपरा में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की जरूरत पड़ सकती है। यही तय करेगा कि यहां छोटे विमान (ATR) आसानी से उतर पाएंगे या नहीं।
UDAN योजना से जुड़ेगा पूरा प्रोजेक्ट
इस पूरी योजना को केंद्र की UDAN स्कीम से जोड़ने की तैयारी है, जिसका मकसद छोटे शहरों को सस्ती हवाई सेवा देना है। अगर मंजूरी मिलती है तो टिकट भी महंगे नहीं होंगे और आम लोग भी हवाई यात्रा कर सकेंगे। हालांकि सबसे बड़ी चुनौती जमीन की है। एयरपोर्ट के लिए रनवे, टर्मिनल और सुरक्षा क्षेत्र के लिए पर्याप्त जमीन चाहिए होगी। इसी वजह से पूरी योजना AAI की रिपोर्ट पर टिकी है।

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