सरकार का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कर्मचारियों का व्यवहार प्रशासन की छवि को प्रभावित करता है। इसी कारण यह नई नियमावली लागू की गई है ताकि सरकारी सेवकों की भूमिका पूरी तरह निष्पक्ष और अनुशासित बनी रहे।
क्या है नया नियम?
नई व्यवस्था के अनुसार, कोई भी सरकारी कर्मचारी अब बिना अनुमति सरकार की नीतियों, फैसलों या योजनाओं पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी नहीं कर सकेगा। इसके अलावा न्यायालयों के निर्णयों पर व्यक्तिगत राय साझा करने पर भी रोक लगाई गई है। नियम तोड़ने की स्थिति में विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
प्रोफाइल फोटो और प्रतीकों पर भी रोक
सरकार ने सोशल मीडिया प्रोफाइल को लेकर भी दिशा-निर्देश तय किए हैं। अब कर्मचारी अपनी डीपी में किसी भी प्रकार के विरोध संकेत, राजनीतिक पहचान या प्रतीकात्मक छवि का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। प्रशासन का कहना है कि इससे सरकारी तंत्र की निष्पक्षता और तटस्थता बनी रहेगी।
निजी पोस्ट और ऑनलाइन व्यवहार पर भी नजर
नए नियमों के तहत कर्मचारियों को सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट, ट्रोलिंग या किसी व्यक्ति को निशाना बनाने जैसी गतिविधियों से दूर रहने को कहा गया है। हालांकि, यदि किसी कर्मचारी को आधिकारिक रूप से सरकार की योजना या अभियान से जुड़ा काम दिया जाता है, तो वह अधिकृत पोस्ट कर सकता है।

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