यूपी पंचायत चुनाव को लेकर बड़ा अपडेट, प्रधानों ने उठाई आवाज

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है, जिसने संभावित उम्मीदवारों और ग्रामीण राजनीति से जुड़े लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन की तारीख एक बार फिर आगे बढ़ा दी है, जिससे चुनाव की समय-सीमा पर अनिश्चितता गहराती जा रही है।

मतदाता सूची जारी होने में फिर देरी

उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने अब अंतिम मतदाता सूची 22 अप्रैल को जारी करने का फैसला लिया है। इससे पहले यह सूची 15 अप्रैल को जारी होनी थी, लेकिन अधूरी तैयारियों के कारण तारीख बढ़ानी पड़ी। आयोग के अनुसार 21 अप्रैल तक कंप्यूटरीकरण, बूथ मैपिंग और अन्य तकनीकी कार्य पूरे किए जाएंगे।

चुनाव टलने के आसार मजबूत

ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए समय पर चुनाव कराना मुश्किल नजर आ रहा है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि पंचायतों में अस्थायी तौर पर प्रशासक नियुक्त किए जा सकते हैं, जब तक चुनाव नहीं हो जाते।

लाखों आपत्तियों ने बढ़ाई चुनौती

मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में दावे और आपत्तियां सामने आईं। अनंतिम सूची में करीब 12.69 करोड़ मतदाता दर्ज किए गए थे, जो पिछले चुनाव के मुकाबले काफी अधिक हैं। इन आपत्तियों के निस्तारण में समय लगने के कारण पूरी प्रक्रिया में देरी हुई है।

पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन भी बाकी

चुनाव प्रक्रिया में देरी का एक बड़ा कारण समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन न होना भी है। बिना इस आयोग की रिपोर्ट के आरक्षण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती, जिससे चुनाव की तारीख तय करना और मुश्किल हो गया है।

प्रधानों ने उठाई समय पर चुनाव की मांग

इस बीच विभिन्न संगठनों ने समय पर चुनाव कराने की मांग तेज कर दी है। अखिल भारतीय प्रधान संगठन के पदाधिकारियों ने कहा है कि यदि समय पर चुनाव संभव नहीं है, तो मौजूदा प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया जाना चाहिए या उन्हें ही प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी दी जाए।

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