1. रूस का बड़ा रक्षा प्रस्ताव
रिपोर्ट्स के अनुसार रूस ने भारत को लगभग 36 से 40 Su-57 लड़ाकू विमानों की दो स्क्वाड्रन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया है। यह डील 2030–31 तक पूरी होने की संभावना है, यदि दोनों देशों के बीच इस वर्ष समझौता हो जाता है।
2. डिलीवरी और टाइमलाइन
प्रस्तावित योजना के तहत इन विमानों की शुरुआती आपूर्ति 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत से शुरू हो सकती है। दशक के अंत तक पूरी स्क्वाड्रन भारतीय वायुसेना में शामिल की जा सकती है, जिससे भारत की एयर पावर में बड़ा इजाफा होगा।
3.स्टील्थ तकनीक की अहमियत
आज के समय में स्टील्थ फाइटर जेट्स को रडार से पकड़ पाना बेहद मुश्किल होता है। इनका रडार क्रॉस सेक्शन बेहद कम होता है, जिससे ये दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देकर सटीक हमले करने में सक्षम होते हैं।
4. भारत की मौजूदा जरूरतें
भारतीय वायुसेना फिलहाल पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की कमी को पूरा करने के विकल्प तलाश रही है। स्वदेशी AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) प्रोजेक्ट के 2030 के दशक में तैयार होने तक अंतरिम समाधान की आवश्यकता है।
5. उत्पादन और तकनीकी अपग्रेड
रूस की योजना है कि 2027 तक Su-57 का उत्पादन बढ़ाकर 16 से 20 विमान प्रति वर्ष किया जाए। साथ ही भविष्य में इन्हें नए जेनरेशन इंजन से अपग्रेड करने की भी तैयारी है, जिससे इनकी क्षमता और बढ़ सकेगी।
6. रणनीतिक असर और क्षेत्रीय समीकरण
इस प्रस्ताव को क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे भारत की वायुसेना की ताकत में इजाफा होगा और दक्षिण एशिया में सामरिक समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है।

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