बातचीत क्यों टूटी?
अमेरिकी पक्ष की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ कहा कि लंबी बातचीत के बावजूद ईरान ने प्रस्तावित शर्तों को स्वीकार नहीं किया। वहीं ईरानी मीडिया ने भी पुष्टि की कि वार्ता का पहला चरण बेनतीजा रहा और आगे की बातचीत भी ठप पड़ गई।
1. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना सबसे बड़ा विवाद
सबसे अहम मुद्दा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नियंत्रण रहा। अमेरिका चाहता है कि यह जलडमरूमध्य पूरी तरह खुला रहे और किसी तरह का शुल्क या बाधा न हो। दूसरी ओर, ईरान इस पर अपने नियंत्रण या कम से कम आंशिक अधिकार बनाए रखना चाहता है। यह वही रास्ता है, जहां से दुनिया के तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है, इसलिए इसका महत्व बेहद संवेदनशील है।
2. लेबनान में सीजफायर पर टकराव
ईरान ने लेबनान में संघर्षविराम को वार्ता की पूर्व-शर्त बना दिया। उसका कहना था कि Hezbollah और इजरायल के बीच सीजफायर जरूरी है। अमेरिका और इजरायल ने इसे खारिज कर दिया, जिससे वार्ता में गतिरोध और गहरा गया।
3. प्रतिबंध और परमाणु कार्यक्रम
ईरान की प्रमुख मांगों में आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना, विदेशों में फंसी संपत्तियों को वापस करना और अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रखने की अनुमति शामिल थी। अमेरिका ने खास तौर पर परमाणु हथियार क्षमता से जुड़े किसी भी समझौते से इनकार कर दिया। यही मतभेद समझौते में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक बना।
4. मुआवजा और व्यापक सीजफायर
ईरान ने हालिया संघर्ष में हुए नुकसान के लिए मुआवजा और पूरे क्षेत्र में व्यापक युद्धविराम की मांग भी रखी। अमेरिका ने इन शर्तों को अव्यावहारिक बताते हुए ठुकरा दिया।
ट्रंप का सख्त रुख
वार्ता से पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि समझौता नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई फिर शुरू हो सकती है। वार्ता विफल होने के बाद भी उनका रुख नरम नहीं पड़ा। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका मजबूत स्थिति में है और जरूरत पड़ने पर कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

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