मिसाइलों की तकनीकी क्षमता
तैनात की गई मिसाइलें टाइप-12 श्रेणी की हैं, जिन्हें मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज ने विकसित किया है। इनकी मारक क्षमता लगभग 1,000 किलोमीटर तक है, जो कि पहले की तुलना में पांच गुना अधिक है। इसका मतलब यह है कि ये मिसाइलें चीन की मुख्य भूमि तक आसानी से पहुंच सकती हैं, जिससे जापान की जवाबी कार्रवाई की क्षमता काफी मजबूत हुई है।
रक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया
जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी ने कहा कि यह कदम देश की आत्मरक्षा और जवाबी क्षमता को और मजबूत करने के लिए लिया गया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान सुरक्षा स्थिति जटिल और चुनौतीपूर्ण है, और ऐसे में जापान को अपने क्षेत्रीय सुरक्षा उपायों को अपग्रेड करना आवश्यक था।
स्थानीय विरोध और चिंता
हालांकि मिसाइलों की तैनाती को लेकर स्थानीय लोग चिंतित हैं। दक्षिण-पश्चिमी द्वीपों में स्थित केंगुन कैंप के बाहर प्रदर्शन हुए, जिसमें स्थानीय लोगों ने कहा कि इससे क्षेत्र में तनाव बढ़ेगा और संभावित लक्ष्यों पर खतरा बढ़ सकता है। जापानी सरकार ने आश्वस्त किया है कि सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया है।
आगे की रणनीति
जापान इस वर्ष के अंत तक अमेरिकी निर्मित टोमाहॉक क्रूज मिसाइलों को अपने विध्वंसक जहाजों पर तैनात करने की योजना बना रहा है। इस योजना के लागू होने के बाद जापान के पास लंबी दूरी की हमला और रक्षा दोनों ही क्षमताएं और मजबूत हो जाएंगी। सरकार का मानना है कि यह कदम पूर्वी चीन सागर में स्थित द्वीपों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य है।
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