5वें वेतन आयोग में दो चरणों में मिला बकाया
5वें वेतन आयोग के दौरान कर्मचारियों को एरियर एक साथ देने के बजाय दो वित्त वर्षों में भुगतान किया गया था। इसकी पहली किस्त 1997-98 और दूसरी किस्त 1998-99 में जारी हुई। इस भुगतान का असर सरकारी खजाने पर भी पड़ा।
छठे वेतन आयोग में भी बढ़ा था खर्च
छठे वेतन आयोग के समय भी एरियर का भुगतान सरकारी वित्तीय प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा। पिछले आयोगों के अनुभव बताते हैं कि जब बड़ी संख्या में कर्मचारियों को पिछली तारीख से बढ़े हुए वेतन का लाभ दिया जाता है, तो सरकार पर एकमुश्त अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है। इसी वजह से वेतन संशोधन की तारीख और भुगतान की व्यवस्था अहम मानी जाती है।
सातवें वेतन आयोग में क्या हुआ था?
सातवें वेतन आयोग ने नए वेतनमान को 1 जनवरी 2016 से प्रभावी करने की सिफारिश की थी। कर्मचारी संगठनों ने इससे पहले की तारीख से लाभ देने की मांग की थी, लेकिन आयोग ने उसे स्वीकार नहीं किया। इस आयोग ने वेतन निर्धारण के लिए 2.57 का फिटमेंट फैक्टर सुझाया था। इसमें मौजूदा मूल वेतन और महंगाई भत्ते को समायोजित करने के साथ वास्तविक वेतन वृद्धि का प्रावधान भी शामिल था।
8वें वेतन आयोग का एरियर कब से बन सकता है?
8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को हुआ था। आयोग को अपनी सिफारिशें तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। इस हिसाब से रिपोर्ट मई 2027 के आसपास आने की संभावना है। इसके बाद सरकार सिफारिशों की समीक्षा करेगी और लागू करने के संबंध में निर्णय लेगी।
कर्मचारी संगठनों की मांग है कि नए वेतनमान का लाभ 1 जनवरी 2026 से दिया जाए। यदि सरकार इस तारीख को प्रभावी मानकर सिफारिशें लागू करती है, तो कर्मचारियों को बाद में एरियर मिल सकता है। लेकिन अभी यह तय नहीं है कि सरकार किस तारीख से नया वेतनमान लागू करेगी या भुगतान किस तरीके से होगा।
एरियर की रकम किन बातों पर निर्भर करेगी?
एरियर की गणना नई और पुरानी सैलरी के अंतर, लागू होने की तारीख, भत्तों और सरकार द्वारा तय नियमों के आधार पर होगी। इसलिए अभी किसी निश्चित रकम का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। कर्मचारियों के लिए अहम बात यह है की 1 जनवरी 2026 से एरियर मिलने की संभावना पर चर्चा जरूर है, लेकिन इसे पक्का सरकारी फैसला नहीं माना जाना चाहिए। वास्तविक स्थिति आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार की अंतिम मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगी।

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