चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद के मुताबिक, कुछ गांवों में लंबे समय से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही थी। ऐसे में चार जिलों के छह गांवों को उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा 6(1) के तहत चकबंदी प्रक्रिया से बाहर करने का निर्णय लिया गया है। इनमें उन्नाव के अजगवां, पिडना और सादाबाद के साथ बरेली का मगरासा गांव शामिल है। इन गांवों में करीब 12 वर्षों से चकबंदी का काम लंबित था।
इसके अलावा बुलंदशहर के बराल गांव में सात साल और बांदा के काजीपुर (गिरवान) गांव में दो साल से प्रक्रिया अटकी हुई थी। विकास योजनाओं, नदी कटान, कम चकबंदी योग्य जमीन और स्थानीय विवादों जैसी वजहों से काम पूरा करने में मुश्किलें आ रही थीं।
वरासत और दाखिल-खारिज के लिए भी चलेगा अभियान
सरकार ने ग्रामीणों को जमीन से जुड़े दूसरे मामलों में राहत देने के लिए 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक विशेष अभियान चलाने की योजना बनाई है। इसके तहत निर्विवाद उत्तराधिकार यानी वरासत और नामांतरण (दाखिल-खारिज) के मामलों का निस्तारण किया जाएगा।
इस पहल से किसानों और ग्रामीणों को जमीन के रिकॉर्ड दुरुस्त कराने तथा लंबे समय से लंबित मामलों के समाधान में मदद मिलने की उम्मीद है।
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