जनवरी-फरवरी में भारत पहुंचेगा आखिरी S-400
रिपोर्ट के अनुसार, अंतिम S-400 स्क्वाड्रन की डिलीवरी से पहले रूस की एक प्री-डिस्पैच टीम भारत का दौरा करेगी। इसके बाद सिस्टम के उपकरण अलग-अलग चरणों में भारत भेजे जाएंगे। सभी जरूरी उपकरण पहुंचने के बाद रूसी इंजीनियरों की टीम यहां उनकी अंतिम असेंबली का काम पूरा करेगी। गौरतलब है कि इसी साल मई-जून में भारत को चौथा S-400 स्क्वाड्रन मिल चुका है। अब पांचवें स्क्वाड्रन की आपूर्ति पूरी होने के साथ वर्ष 2018 में रूस के साथ हुआ पांच सिस्टम खरीदने का पुराना समझौता पूरा हो जाएगा।
2018 में हुई थी 5.43 अरब डॉलर की डील
भारत ने वर्ष 2018 में रूस के साथ करीब 5.43 अरब डॉलर का समझौता किया था। इसके तहत S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम के पांच स्क्वाड्रन खरीदे जाने थे। इनमें से चार भारत को मिल चुके हैं और अब आखिरी स्क्वाड्रन का इंतजार है। इन सिस्टमों की तैनाती पाकिस्तान और चीन से लगी सीमाओं पर की गई है। S-400 की खासियत यह है कि यह दुश्मन के लड़ाकू विमानों, ड्रोन और मिसाइलों जैसे हवाई खतरों का पता लगाकर उन्हें निशाना बना सकता है। इससे संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में भारत की हवाई सुरक्षा को अतिरिक्त मजबूती मिलती है।
पांच और S-400 खरीदने की तैयारी
भारत की रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने इसी साल मार्च में रूस से पांच अतिरिक्त S-400 सिस्टम खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। हालांकि, इस खरीद को लेकर दोनों देशों के बीच औपचारिक समझौता होना अभी बाकी है। प्रस्तावित सौदे के तहत कीमत, डिलीवरी की समयसीमा और तकनीक हस्तांतरण जैसे मुद्दों पर बातचीत जारी है। यदि यह समझौता पूरा हो जाता है तो भारत के पास कुल 10 S-400 स्क्वाड्रन हो सकते हैं। इससे देश की वायु रक्षा प्रणाली का दायरा और बढ़ जाएगा।

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