यूपी सरकार का फैसला, इन कर्मियों को 1 बड़ी खुशखबरी, परेशानी दूर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में साक्षर भारत योजना के तहत काम कर चुके साक्षरता कर्मियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से मानदेय का इंतजार कर रहे जिला और ब्लॉक समन्वयकों के साथ प्रेरकों को अब उनका बकाया भुगतान मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। राज्य सरकार ने इस दिशा में कदम उठाते हुए प्रदेश के 64 जिलों के लिए करीब 397.19 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की है।

यह भुगतान उन कर्मियों से संबंधित है, जिन्होंने 31 मार्च 2018 तक साक्षर भारत योजना के अंतर्गत अपनी सेवाएं दी थीं। योजना के तहत गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों में लोगों को साक्षर बनाने का काम किया गया था। लंबे समय से मानदेय लंबित होने के कारण संबंधित कर्मचारी भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे थे।

किसे कितना मिलेगा मानदेय?

राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, योजना में काम करने वाले प्रेरकों को 2,000 रुपये प्रतिमाह की दर से मानदेय दिया जाएगा। वहीं, जिला और ब्लॉक समन्वयकों के लिए यह दर 6,000 रुपये प्रतिमाह निर्धारित की गई है। संबंधित कर्मियों का कुल बकाया उनकी कार्य अवधि और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर तय किया जाएगा।

भुगतान से पहले होगी दस्तावेजों की जांच

सरकार ने भुगतान की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सत्यापन को जरूरी किया है। संबंधित जिलों में कर्मचारियों की उपस्थिति, उनके द्वारा किए गए कार्य और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच की जाएगी। जिला स्तर पर मौजूद ऑडिट रिपोर्ट और अन्य अभिलेखों के आधार पर प्रत्येक कर्मचारी की बकाया राशि निर्धारित होगी। जांच पूरी होने के बाद पात्र कर्मियों के बैंक खातों में सीधे भुगतान किया जाएगा। 

जिलों को समयसीमा में प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश

बेसिक शिक्षा विभाग ने संबंधित जिलों को आवंटित धनराशि का उपयोग 31 दिसंबर तक करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, पांच जनवरी तक खर्च का पूरा विवरण और उपयोगिता प्रमाणपत्र निदेशालय को भेजना होगा। इससे भुगतान की प्रक्रिया को तय समयसीमा में पूरा करने की तैयारी है।

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