1. शेयर बायबैक पर बदलेगा टैक्स नियम
सबसे बड़ा बदलाव कंपनियों द्वारा शेयर बायबैक के नियम में देखने को मिलेगा। पहले कंपनियां अपने शेयर वापस खरीदते समय टैक्स का भुगतान खुद करती थीं। अब यह जिम्मेदारी निवेशकों पर आ जाएगी। यानी बायबैक से मिलने वाली रकम को निवेशकों की आय माना जाएगा और उन्हें अपने टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स चुकाना होगा।
2. शेयर बाजार में ट्रेडिंग होगी महंगी
शेयर बाजार में फ्यूचर्स और ऑप्शंस में ट्रेडिंग करने वालों के लिए भी नियम बदले हैं। सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) की दर बढ़ा दी गई है। ऑप्शंस की बिक्री पर यह दर 0.1 प्रतिशत और फ्यूचर्स की बिक्री पर 0.02 प्रतिशत कर दी गई है। इससे ट्रेडिंग की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर छोटे निवेशकों के मुनाफे पर पड़ सकता है।
3. विदेश पैसे भेजने पर राहत
सरकार ने विदेश में पढ़ाई या इलाज के लिए पैसे भेजने वाले लोगों को राहत देने का फैसला किया है। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम के तहत सात लाख रुपये से अधिक की रकम भेजने पर टीसीएस की दर को कम किया जा सकता है। इससे विदेश में शिक्षा और चिकित्सा खर्चों के लिए पैसा भेजना थोड़ा सस्ता हो जाएगा।
4. टीडीएस के नियम होंगे आसान
सरकार टीडीएस से जुड़े नियमों को भी सरल बनाने की दिशा में काम कर रही है। कुछ भुगतान श्रेणियों में टीडीएस की दरों को कम किया जा सकता है। इसके अलावा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले विक्रेताओं के लिए टीडीएस दर में भी कमी की संभावना है, जिससे छोटे कारोबारियों को फायदा मिलेगा।
5. विदेशी संपत्ति की जानकारी पर नियम नरम
विदेश में छोटे निवेश रखने वाले लोगों के लिए भी राहत की खबर है। यदि किसी व्यक्ति के पास सीमित मूल्य की विदेशी संपत्ति है और वह अनजाने में उसकी जानकारी देना भूल जाता है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाने की सख्ती कम की जा सकती है। इससे छोटे निवेशकों को राहत मिलेगी।
6. नया टैक्स रिजीम होगा ज्यादा आकर्षक
सरकार लोगों को नए टैक्स सिस्टम की ओर आकर्षित करने के लिए कुछ बदलाव कर सकती है। इसमें स्टैंडर्ड डिडक्शन और टैक्स स्लैब में मामूली बदलाव किए जा सकते हैं, जिससे मध्यम वर्ग को थोड़ी अतिरिक्त राहत मिल सकती है।
7. चैरिटेबल संस्थाओं के नियम सख्त
चैरिटेबल ट्रस्ट और संस्थाओं के लिए भी नए नियम लागू किए जा सकते हैं। इनके पंजीकरण और टैक्स छूट से जुड़ी प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाया जा सकता है ताकि पारदर्शिता बढ़े और टैक्स चोरी पर रोक लगाई जा सके।
टैक्स प्लानिंग के लिए जरूरी जानकारी
इन सभी बदलावों के लागू होने के बाद टैक्स फाइलिंग और निवेश से जुड़ी रणनीति में कुछ बदलाव करना जरूरी हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्सपेयर्स को समय रहते नए नियमों की जानकारी लेकर अपनी वित्तीय योजना को उसी अनुसार तैयार कर लेना चाहिए।

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