भारतीय प्रतिभा का दुनिया में डंका, वैश्विक भर्तियों में 24% की तेज़ बढ़ोतरी

नई दिल्ली। दुनिया के बदलते रोजगार बाजार में भारतीय प्रतिभा की मांग लगातार बढ़ रही है। अब वैश्विक कंपनियां केवल कम लागत के कारण नहीं, बल्कि विशेष कौशल और तकनीकी दक्षता की तलाश में अलग-अलग देशों से लोगों की नियुक्ति कर रही हैं। हाल ही में जारी एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि भारतीय पेशेवरों की मांग दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही है।

यह रिपोर्ट 150 से अधिक देशों के लगभग 10 लाख कर्मचारियों के आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है। इसमें बताया गया है कि वैश्विक कंपनियों की नियुक्ति रणनीति तेजी से बदल रही है और इस बदलाव में भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की मजबूत स्थिति

रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में प्रतिभा उपलब्ध कराने वाले देशों में भारत तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। सबसे खास बात यह है कि विदेशी कंपनियों द्वारा भारत में की जाने वाली नियुक्तियों में सालाना लगभग 24 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि भारतीय पेशेवरों की योग्यता, तकनीकी कौशल और कार्यक्षमता पर वैश्विक कंपनियों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रशिक्षण में भारत का बढ़ता दबदबा

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्तमान समय में दुनिया भर में लगभग 70 हजार से अधिक लोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणाली को प्रशिक्षित करने का काम कर रहे हैं। इस क्षेत्र में सबसे अधिक विशेषज्ञ अमेरिका में हैं, लेकिन भारत दूसरे स्थान पर पहुंच चुका है। इसके बाद फिलीपींस और कनाडा जैसे देशों का स्थान आता है।

इस क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही नौकरियां

रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2025 में कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रशिक्षक का पद दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली नौकरियों में शामिल रहा है। इस क्षेत्र में लगभग 283 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इन पेशेवरों की आय उनके कौशल और अनुभव के आधार पर अलग-अलग होती है। लगभग 30 प्रतिशत प्रशिक्षक डेटा से जुड़े कामों के लिए प्रति घंटे करीब 1200 से 1600 रुपये तक कमाते हैं। 

वहीं विशेषज्ञ स्तर के पेशेवर प्रति घंटे 8 हजार रुपये से अधिक की कमाई भी कर सकते हैं। हालांकि रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कई देशों में अभी भी पुरुष और महिला कर्मचारियों के वेतन में अंतर देखा जाता है। हालांकि, अब बड़ी कंपनियां सस्ते श्रम की जगह विशेषज्ञता को महत्व दे रही हैं और अलग-अलग देशों से कुशल लोगों की नियुक्ति कर रही हैं।

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