पहले से बढ़ा विकास दर का अनुमान
फिच ने इससे पहले दिसंबर 2025 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था। अब नए आकलन में इसे बढ़ाकर 7.5 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके अलावा एजेंसी ने अगले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भी विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 6.4 प्रतिशत बताया गया था।
वैश्विक संकट के बीच भारत की मजबूती
एक ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण कई अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव है, वहीं भारत की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है। मजबूत घरेलू बाजार और उपभोक्ता मांग को भारत की आर्थिक मजबूती का बड़ा कारण माना जा रहा है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था की धीमी रफ्तार
फिच के मार्च 2026 के ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक के अनुसार, वर्ष 2026 में वैश्विक जीडीपी वृद्धि दर लगभग 2.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यानी दुनिया की आर्थिक रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रहने की संभावना है।
तेल की कीमतों पर नजर
फिच रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री ब्रायन कौल्टन के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। हालांकि फिलहाल एजेंसी को उम्मीद है कि ऊर्जा कीमतों में बहुत बड़ा और स्थायी उछाल नहीं आएगा।
आर्थिक गतिविधियों में कुछ सुस्ती के संकेत
फिच ने यह भी संकेत दिया है कि वर्ष की शुरुआत में आर्थिक गतिविधियों में थोड़ी धीमी गति देखने को मिली है। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था लचीली बनी हुई है। बैंकिंग सेक्टर में क्रेडिट ग्रोथ अभी भी दो अंकों में है, जो आर्थिक गतिविधियों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

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