सरकार ने इस योजना के माध्यम से लगभग 14.04 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा से जोड़ने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए नहरों के जाल को मजबूत किया जा रहा है और जहां जरूरत है वहां नए निर्माण कार्य भी किए जा रहे हैं।
कुलाबों के निर्माण से बढ़ेगी सिंचाई सुविधा
सरयू नहर परियोजना के तहत पूर्वी उत्तर प्रदेश के नौ जिलों में कुल 9000 कुलाबों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से करीब 7345 कुलाबों का निर्माण पूरा हो चुका है। शेष 1655 कुलाबों का निर्माण वर्ष 2026–27 के दौरान पूरा किया जाएगा। इन कुलाबों के बनने से लगभग 66 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। इससे किसानों को रबी और खरीफ दोनों मौसम की फसलों की खेती में लाभ होगा।
नहरों की अधूरी कड़ियों को किया जा रहा पूरा
कई स्थानों पर नहरों के अधूरे हिस्सों के कारण खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाता था। ऐसे 14 स्थानों पर निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। यह कार्य पूरा होने के बाद लगभग 27 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा बेहतर हो जाएगी।
कम पानी वाले क्षेत्रों के लिए नई व्यवस्था
जिन इलाकों में पानी की उपलब्धता कम है, वहां आधुनिक तकनीक के माध्यम से सिंचाई व्यवस्था विकसित की जा रही है। इस योजना के तहत विशेष प्रकार की सिंचाई प्रणाली लागू की जा रही है, जिससे कम पानी में भी खेतों की सिंचाई संभव हो सकेगी। सरकार का लक्ष्य इस व्यवस्था के माध्यम से लगभग 1.31 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई सुविधा से जोड़ना है।
किसानों की आय बढ़ाने की कोशिश
सरकार का मानना है कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से खेती की लागत कम होगी और उत्पादन में वृद्धि होगी। सरयू नहर परियोजना के विस्तार से पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है और उनकी आय में भी बढ़ोतरी हो सकती है। यह परियोजना किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आ रही है, जिससे खेती को मजबूत बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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