ईरान जंग के बीच अमेरिका का फैसला, रूस की हो गई चांदी!

न्यूज डेस्क। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े संघर्ष के बीच अमेरिका ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। वॉशिंगटन ने कुछ देशों को समुद्र में पहले से मौजूद रूसी तेल खरीदने की अस्थायी अनुमति दे दी है। माना जा रहा है कि इस फैसले से रूस को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा मिल सकता है और वैश्विक तेल बाजार में भी हलचल तेज हो गई है।

रूसी तेल खरीदने की अस्थायी मंजूरी

अमेरिकी वित्त विभाग की ओर से जारी नोटिस के अनुसार, जिन जहाजों पर 12 मार्च या उससे पहले रूसी कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद लादे जा चुके हैं, उनसे जुड़े लेन-देन की अनुमति दी गई है। यह अनुमति सीमित अवधि के लिए दी गई है और 11 अप्रैल तक प्रभावी रहेगी। इस फैसले का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आपूर्ति को बनाए रखना बताया जा रहा है।

ऊर्जा बाजार को स्थिर करने की कोशिश

अमेरिका का यह कदम ऐसे समय में आया है जब ईरान से जुड़े सैन्य तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। तेल की कीमतों में तेजी आने से कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने लगा है। ऐसे में अमेरिका आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रहा है।

पहले भारत को मिली थी राहत

इससे पहले अमेरिका ने भारत को भी रूसी तेल से जुड़े कुछ मामलों में राहत दी थी। अब अन्य देशों को भी सीमित समय के लिए छूट मिलने से अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार में नई हलचल देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वैश्विक ऊर्जा संकट को कम करने की दिशा में उठाया गया है।

अमेरिका का कहना-रूस को नहीं होगा बड़ा फायदा

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह अनुमति केवल उस तेल के लिए है जो पहले से जहाजों में लदा हुआ है और रास्ते में है। उनका दावा है कि इससे रूस को अतिरिक्त आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा, क्योंकि यह पहले से मौजूद आपूर्ति को बाजार तक पहुंचाने के लिए दी गई अस्थायी मंजूरी है।

हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से रूस को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिल सकता है। पहले अमेरिका ने रूस पर प्रतिबंध लगाकर उसके तेल व्यापार को सीमित करने की कोशिश की थी, लेकिन मौजूदा ऊर्जा संकट के बीच नीति में यह बदलाव चर्चा का विषय बन गया है।

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