1. न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग
पेंशनभोगी संगठनों का कहना है कि मौजूदा न्यूनतम पेंशन आज के खर्चों के मुकाबले काफी कम है। इसलिए इसे बढ़ाकर लगभग ₹20,500 से ₹25,740 के बीच करने का प्रस्ताव रखा गया है। कुछ संगठनों ने इसे ₹26,000 से अधिक करने का सुझाव भी दिया है। उनका तर्क है कि महंगाई और स्वास्थ्य खर्चों को देखते हुए यह बढ़ोतरी जरूरी है।
2. फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी
फिटमेंट फैक्टर वह सूत्र है जिससे पुराने वेतन और पेंशन को नए वेतन ढांचे में बदला जाता है। पेंशनभोगी संगठनों ने इसे मौजूदा 2.57 से बढ़ाकर 3.00 या 3.25 करने की मांग की है। यदि ऐसा होता है तो पेंशन की मूल राशि में सीधे तौर पर बड़ा इजाफा हो सकता है।
3. पेंशन कम्युटेशन अवधि घटाने का प्रस्ताव
वर्तमान नियमों के अनुसार यदि कोई पेंशनभोगी अपनी पेंशन का एक हिस्सा अग्रिम रूप से लेता है, तो उसकी पूरी बहाली होने में 15 साल का समय लगता है। कुछ कर्मचारी संगठनों का सुझाव है कि इस अवधि को घटाकर 11 से 12 साल कर दिया जाए, ताकि रिटायर्ड कर्मचारियों को जल्दी पूरा लाभ मिल सके।
4. नियमित अंतराल पर पेंशन में वृद्धि
पेंशनभोगियों की एक और प्रमुख मांग है कि पेंशन में नियमित अंतराल पर बढ़ोतरी की व्यवस्था हो। प्रस्ताव है कि हर 5 साल में कम से कम 5% की बढ़ोतरी की जाए। इससे बढ़ती उम्र के साथ स्वास्थ्य, दवाइयों और अन्य जरूरी खर्चों को संभालने में मदद मिलेगी।
5. फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस बढ़ाने की मांग
जो पेंशनभोगी CGHS सुविधा वाले क्षेत्रों से बाहर रहते हैं, उन्हें फिलहाल ₹1,000 प्रति माह फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस मिलता है। पेंशनभोगी संगठनों ने इसे काफी कम बताते हुए इसे ₹20,000 प्रति माह तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है, ताकि बुजुर्गों के बढ़ते मेडिकल खर्चों को पूरा किया जा सके।
क्या सरकार इन मांगों को मानेगी?
इन सभी प्रस्तावों पर अभी चर्चा और विचार का दौर जारी है। अंतिम निर्णय सरकार और वेतन आयोग की सिफारिशों पर निर्भर करेगा। हालांकि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को उम्मीद है कि नए वेतन आयोग के जरिए उन्हें आर्थिक राहत मिल सकती है।

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