क्षेत्र में पहले से मौजूद हैं हजारों अमेरिकी सैनिक
मौजूदा समय में पश्चिम एशिया में अमेरिका के 50 हजार से अधिक सैनिक पहले से ही तैनात हैं और विभिन्न सैन्य अभियानों में शामिल हैं। बढ़ते तनाव को देखते हुए अब अतिरिक्त सैनिक और युद्धपोत भी भेजे जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी नौसेना का शक्तिशाली युद्धपोत USS Tripoli (LHA‑7) के नेतृत्व वाला एम्फीबियस रेडी ग्रुप भी इस क्षेत्र की ओर भेजा जा रहा है। इसके साथ करीब 2,500 मरीन सैनिक भी तैनात किए जाएंगे।
मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट की तैनाती
अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने बताया है कि इस मिशन के तहत 31st Marine Expeditionary Unit को भी तैनात किया जा रहा है। यह यूनिट स्ट्राइक ग्रुप का अहम हिस्सा होगी और जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई में भाग ले सकती है।
बेहद शक्तिशाली युद्धपोत है यूएसएस त्रिपोली
यूएसएस त्रिपोली अमेरिकी नौसेना के सबसे बड़े एम्फीबियस असॉल्ट जहाजों में गिना जाता है। इसका आकार लगभग एक विमानवाहक पोत जितना बड़ा माना जाता है। यह जहाज कई तरह के सैन्य उपकरण और विमान ले जाने में सक्षम है। इसमें दर्जनों हेलीकॉप्टर, MV‑22 Osprey जैसे विशेष विमान और F‑35B Lightning II जैसे आधुनिक लड़ाकू जेट तैनात किए जा सकते हैं। इसके अलावा इसमें 1700 से अधिक मरीन सैनिकों को उनके हथियारों और उपकरणों के साथ तैनात करने की क्षमता भी है।
जापान से पश्चिम एशिया की ओर बढ़ रहा जहाज
मौजूदा समय में यह युद्धपोत जापान में तैनात है। अनुमान लगाया जा रहा है कि यह एक से दो सप्ताह के भीतर पश्चिम एशिया में U.S. Central Command के संचालन क्षेत्र में पहुंच जाएगा। इसके बाद यह जहाज वहां पहले से मौजूद अमेरिकी सैन्य बलों के साथ मिलकर रणनीतिक मिशनों में हिस्सा ले सकता है।
पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियों के कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर वैश्विक राजनीति, व्यापार और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं और क्या कूटनीतिक प्रयासों से इस तनाव को कम किया जा सकेगा।
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