ईरान युद्ध से रूस की ताबड़तोड़ कमाई, पुतिन के चेहरे पर मुस्कान!

नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े युद्ध हालात का असर पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे रहा है। इस उथल-पुथल के बीच रूस को आर्थिक रूप से बड़ा फायदा होता नजर आ रहा है। तेल की कीमतों में तेजी और आपूर्ति मार्गों में आई बाधाओं के कारण रूस की कमाई में अचानक बढ़ोतरी होने की चर्चा है।

रिपोर्टों के अनुसार वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने से रूस की आय में बड़ा इजाफा हुआ है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि मौजूदा परिस्थितियों में रूस को तेल निर्यात से प्रतिदिन करोड़ों डॉलर की अतिरिक्त कमाई हो रही है। इससे रूसी अर्थव्यवस्था को अस्थायी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

समुद्र में खड़े है रूसी तेल टैंकर

जहाजों की आवाजाही से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक एशियाई समुद्री क्षेत्र में कई टैंकर रूसी कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद लेकर खड़े हैं। इन जहाजों में लाखों बैरल कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में रिफाइंड ईंधन मौजूद है। इनमें कुछ टैंकर ऐसे भी हैं जो अभी अंतिम गंतव्य का इंतजार कर रहे हैं। कई जहाज चीन के समुद्री क्षेत्र के पास दिखाई दे रहे हैं, जबकि कुछ अरब सागर में मौजूद हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन टैंकरों का उपयोग तब तक प्रतीक्षा में रखा जाता है जब तक खरीदारों के साथ सौदा तय नहीं हो जाता।

तेल के अलग-अलग ग्रेड की सप्लाई

समुद्र में मौजूद कई जहाज रूस के अलग-अलग प्रकार के कच्चे तेल को लेकर चल रहे हैं। इनमें हल्के और मध्यम श्रेणी के तेल शामिल हैं, जिनकी मांग एशियाई बाजारों में काफी अधिक रहती है। इसके अलावा कुछ जहाजों में नैफ्था और डीजल जैसे रिफाइंड उत्पाद भी हैं। नैफ्था का उपयोग खास तौर पर प्लास्टिक उद्योग में कच्चे माल के रूप में किया जाता है। हाल के हफ्तों में इस ईंधन की कीमतों में भी तेजी देखी गई है।

ऊर्जा बाजार पर युद्ध का असर

ईरान से जुड़े तनाव और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास स्थिति संवेदनशील होने से तेल और गैस की ढुलाई प्रभावित हो रही है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतें बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आपूर्ति में आई अनिश्चितता और बढ़ती मांग के कारण तेल निर्यात करने वाले देशों को फिलहाल ज्यादा लाभ मिल रहा है, जिनमें रूस भी शामिल है।

ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता जारी

मध्य-पूर्व में जारी तनाव और समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक जारी रहती है तो तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल हालात ऐसे हैं कि वैश्विक संकट के बीच रूस को तेल व्यापार से आर्थिक लाभ मिलता दिखाई दे रहा है, जबकि दुनिया के कई देश ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता में हैं।

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