मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारतीय सेना की तीनों शाखाएं थल सेना, वायु सेना और नौसेना इस आधुनिक ड्रोन को अपने बेड़े में शामिल करने की तैयारी कर रही हैं। इससे देश की संयुक्त निगरानी प्रणाली और अधिक प्रभावी हो जाएगी और संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखना आसान होगा।
लंबे समय तक उड़ान भरने में सक्षम
Heron Mk II ड्रोन को मध्यम ऊंचाई पर लंबी अवधि तक उड़ान भरने के लिए डिजाइन किया गया है। यह एक MALE (Medium Altitude Long Endurance) श्रेणी का ड्रोन है, जिसे खास तौर पर खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी और टोही मिशनों के लिए बनाया गया है। इस ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह लगभग 45 घंटे तक लगातार उड़ान भर सकता है। इसके अलावा यह करीब 35 हजार फीट की ऊंचाई तक पहुंच सकता है और बड़ी दूरी तक निगरानी करने में सक्षम है।
उन्नत तकनीक से लैस
Heron Mk II ड्रोन में आधुनिक सेंसर और संचार प्रणाली लगाई जाती है, जिससे यह दिन और रात दोनों समय निगरानी कर सकता है। इसकी अधिकतम टेकऑफ क्षमता करीब 1,430 किलोग्राम बताई जाती है और इसकी गति लगभग 280 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।
इसमें लगा सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम (SATCOM) इसे खास बनाता है। इस तकनीक की मदद से ड्रोन को बहुत दूर से भी नियंत्रित किया जा सकता है। यानी यह पारंपरिक लाइन-ऑफ-साइट से कहीं अधिक दूरी तक ऑपरेशन कर सकता है और लंबे समय तक मिशन पर रह सकता है।
पहले भी खरीद चुका है भारत
भारत ने इस ड्रोन को पहली बार कुछ साल पहले अपनी सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए खरीदा था। उस समय सीमावर्ती इलाकों में बढ़े तनाव के बाद सरकार ने आपातकालीन प्रक्रिया के तहत कुछ Heron Mk II ड्रोन खरीदे थे। उन ड्रोन को सेना और वायु सेना के उपयोग के लिए तैनात किया गया था।
भारत में निर्माण की योजना
अब नई खरीद के साथ-साथ इस ड्रोन के भारत में निर्माण की संभावना पर भी चर्चा चल रही है। यह योजना मेक इन इंडिया पहल के तहत आगे बढ़ाई जा सकती है। अगर यह योजना सफल होती है, तो भारतीय रक्षा उद्योग को नई तकनीक और उत्पादन क्षमता का लाभ मिलेगा। संभावना है कि इस परियोजना में देश की रक्षा कंपनियां और इजरायली तकनीक मिलकर काम करेंगी। इससे भविष्य में तकनीक हस्तांतरण और स्वदेशी उत्पादन को भी बढ़ावा मिल सकता है।

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