राजदूत ने एक बातचीत के दौरान बताया कि कुछ वर्ष पहले भारत को गैस भेजने के लिए जरूरी व्यवस्था और समझौते किए गए थे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण उस योजना में रुकावट आ गई थी। उनका कहना है कि अब दोनों देशों के बीच फिर से गैस आपूर्ति को लेकर नए विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
पहले हुआ था लंबा समझौता
भारत की सरकारी गैस कंपनी गेल इंडिया ने रूस की सरकारी गैस कंपनी गजप्रोम के साथ लंबे समय के लिए समझौता किया था। इस समझौते के तहत रूस को बीस साल तक हर वर्ष करीब पच्चीस लाख टन गैस भारत को भेजनी थी। यह सौदा उस समय दुनिया के सस्ते गैस समझौतों में से एक माना गया था।
युद्ध के बाद बदली स्थिति
2022 में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद कई पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए। इसके कारण रूस की गैस कंपनियों की विदेशी इकाइयों पर असर पड़ा और गैस आपूर्ति की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई। इसी वजह से भारत को मिलने वाली कुछ गैस खेप समय पर नहीं पहुंच सकी।
भारत के फैसले का समर्थन
रूस के राजदूत ने यह भी कहा कि भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए स्वतंत्र रूप से फैसले लेने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा खरीद से जुड़े निर्णय लिए हैं।
भारत के लिए क्यों अहम है गैस आपूर्ति
भारत जैसे तेजी से बढ़ते देश के लिए ऊर्जा की लगातार बढ़ती मांग एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में अगर रूस से गैस आपूर्ति फिर से शुरू होती है तो इससे देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है और आम लोगों को भी राहत मिल सकती है। यदि दोनों देशों के बीच यह व्यवस्था फिर से सक्रिय होती है तो आने वाले समय में भारत की ऊर्जा सुरक्षा और मजबूत हो सकती है।

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