दरअसल, सरकार ने बताया है कि वर्तमान समय में Old Pension Scheme (OPS) के तहत पेंशन पाने वालों की संख्या नए सिस्टम की तुलना में बहुत ज्यादा है। आंकड़ों के मुताबिक लगभग 139 OPS पेंशनर्स पर केवल 1 National Pension System (NPS) पेंशनर है।
संसद में दी गई जानकारी
यह जानकारी संसद में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने साझा की। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 तक करीब 69 लाख पेंशनर्स को पुरानी पेंशन योजना के तहत भुगतान किया जा रहा था, जबकि NPS के तहत पेंशन पाने वालों की संख्या लगभग 50 हजार के आसपास है।
NPS पेंशनर्स की संख्या कम क्यों
विशेषज्ञों का कहना है कि NPS पेंशनर्स की संख्या कम होने का मुख्य कारण इसकी शुरुआत का समय है। केंद्र सरकार ने यह नई पेंशन व्यवस्था 1 जनवरी 2004 से लागू की थी। इसके बाद भर्ती हुए कर्मचारी अभी बड़ी संख्या में सेवा में ही हैं और अधिकांश कर्मचारी आने वाले वर्षों में ही सेवानिवृत्त होंगे। इस वजह से अभी तक NPS के तहत पेंशन पाने वालों की संख्या सीमित है, जबकि पुरानी व्यवस्था के तहत रिटायर हुए कर्मचारियों की संख्या अधिक है।
2034 के बाद बदल सकती है तस्वीर
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह अनुपात बदल सकता है। यदि किसी सरकारी कर्मचारी की औसत सेवा अवधि लगभग 30 वर्ष मानी जाए, तो 2004 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों का बड़ा हिस्सा 2034 के आसपास सेवानिवृत्त होना शुरू करेगा। उस समय NPS के तहत पेंशन पाने वालों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है और OPS पेंशनर्स का अनुपात धीरे-धीरे कम होने लगेगा।
OPS को लेकर अभी भी जारी बहस
देश के कई राज्यों में पुरानी पेंशन व्यवस्था को दोबारा लागू करने की मांग उठती रही है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि OPS को लागू करना राज्यों का नीतिगत निर्णय है। वहीं वित्तीय विशेषज्ञों और ऑडिट संस्थानों ने यह भी चेतावनी दी है कि इस योजना को वापस लाने से राज्यों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
पेंशन सिस्टम में सुधार की कोशिश
पेंशन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार नई व्यवस्थाओं और डिजिटल प्रक्रियाओं पर भी काम कर रही है। इसी दिशा में Unified Pension Scheme (UPS) का विकल्प भी सामने लाया गया है, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद अधिक स्थिर और भरोसेमंद लाभ देना है। इसके साथ ही पेंशन से जुड़ी कई प्रक्रियाएं अब डिजिटल कर दी गई हैं, जिससे आवेदन, सत्यापन और भुगतान की प्रक्रिया पहले से आसान और पारदर्शी हो सके।

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