दरअसल, विभाग के अनुसार लंबे समय से यह देखा जा रहा था कि कई कर्मचारी बार-बार प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने के लिए अनुमति मांगते हैं। परीक्षा की तैयारी और उसमें शामिल होने की प्रक्रिया के कारण उनके नियमित कार्य प्रभावित होते हैं।
इससे न केवल सरकारी कामकाज की गति धीमी पड़ती है, बल्कि विभागीय कार्यों के समय पर पूरा होने में भी बाधा आती है। सरकार का मानना है कि जब कोई व्यक्ति सरकारी सेवा में शामिल होता है, तो उसे अपने दायित्वों को प्राथमिकता देनी चाहिए। ऐसे में बार-बार परीक्षा देने की अनुमति देना लोकहित के खिलाफ माना गया है।
क्या है नया नियम?
नए आदेश के अनुसार अब किसी भी कर्मचारी को उसकी पूरी सेवा अवधि में केवल एक बार ही प्रतियोगी परीक्षा में बैठने की अनुमति मिलेगी। हालांकि यह अनुमति भी तभी मिलेगी, जब वह परीक्षा वर्तमान पद से उच्च वेतन स्तर वाली नौकरी के लिए हो।
सख्त शर्तें भी लागू
सरकार ने इस नियम को और सख्त बनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई कर्मचारी एक से अधिक बार परीक्षा देना चाहता है, तो उसे अपनी सरकारी नौकरी से त्यागपत्र देना होगा। यानी अब नौकरी करते हुए बार-बार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और प्रयास करना संभव नहीं होगा।
क्या हो सकता है असर?
इस फैसले का सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा जो सरकारी नौकरी में रहते हुए बेहतर अवसरों की तलाश में लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। अब उन्हें अपने करियर को लेकर ज्यादा सोच-समझकर निर्णय लेना होगा। वहीं, सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से कर्मचारियों का ध्यान अपने काम पर अधिक केंद्रित होगा और विभागीय कार्यों में तेजी आएगी।

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