बता दें की यह एक्सप्रेसवे गाजीपुर के 86, बलिया के 99 और सारण जिले के 4 गांवों को सीधे जोड़ता है। इसके अलावा, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, एनएच-24 और मांझी-ताजपुर मार्ग जैसे प्रमुख मार्ग भी आपस में जुड़े रहेंगे, जिससे क्षेत्रीय संपर्क और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
एनएचएआई परियोजना निदेशक पीयूष अग्रवाल का कहना है कि इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का 88 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और पैकेज चार के तहत करीमुद्दीनपुर में आरओबी का निर्माण भी शुरू हो चुका है। यह परियोजना पूर्वांचल की तस्वीर बदलने वाली है।
चार हिस्सों में तेजी से चल रहा काम
इस महात्वाकांक्षी ₹5311 करोड़ के प्रोजेक्ट को चार पैकेजों में बांटकर काम किया जा रहा है:
पैकेज 1: गाजीपुर (हृदयपुर) से शाहपुर तक का निर्माण लगभग पूरा।
पैकेज 2: शाहपुर से पिंडारी के बीच इलेक्ट्रिक लाइनों को शिफ्ट करने का काम जारी।
पैकेज 3: पिंडारी से रिविलगंज (बिहार) तक मिट्टी भराई का अंतिम दौर चल रहा।
पैकेज 4: बक्सर स्पर के तहत करीमुद्दीनपुर रेलवे स्टेशन के पास 205 मीटर लंबे आरओबी का निर्माण शुरू।
सफर में होगी भारी राहत
इस एक्सप्रेसवे के पूरा होने के बाद गाजीपुर से बलिया होते हुए छपरा तक का सफर सिर्फ 1.5 घंटे में पूरा किया जा सकेगा, जबकि अब यह 4 घंटे से अधिक का समय लेता है। वाहनों की अधिकतम रफ्तार 100 किमी प्रति घंटा निर्धारित की गई है।
इसके निर्माण से पटना, बक्सर और छपरा जैसे बड़े शहर सीधे लखनऊ और दिल्ली से जुड़ जाएंगे, जिससे व्यापार और यातायात दोनों में तेजी आएगी।

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