इस नई पहल से रजिस्ट्री प्रक्रिया न केवल आसान होगी, बल्कि समय की भी बचत होगी। लोगों को अलग-अलग काउंटरों पर भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी और उन्हें एक ही स्थान पर सभी जरूरी जानकारी और सहायता मिल जाएगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार की संभावना भी कम होगी।
फ्रंट ऑफिस से मिलेगी सीधी मदद
नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्री कार्यालयों में 'फ्रंट ऑफिस' बनाए जाएंगे। यह व्यवस्था ठीक उसी तरह काम करेगी, जैसे पासपोर्ट सेवा केंद्रों में फ्रंट डेस्क पर लोगों को मार्गदर्शन दिया जाता है। इन फ्रंट ऑफिस में प्रशिक्षित विशेषज्ञ तैनात होंगे, जो लोगों को रजिस्ट्री से जुड़ी हर प्रक्रिया में मदद करेंगे। यह विशेषज्ञ दस्तावेजों की जांच से लेकर स्टांप ड्यूटी की जानकारी, रजिस्ट्री प्रक्रिया और जरूरी औपचारिकताओं तक हर चरण में सहायता करेंगे।
चार विशेषज्ञों की टीम करेगी सहायता
प्रत्येक फ्रंट ऑफिस में शुरुआती चरण में चार विशेषज्ञ तैनात किए जाएंगे। ये लोग रजिस्ट्री कराने आने वाले नागरिकों को पूरी प्रक्रिया समझाने, कागजी कार्यवाही पूरी कराने और आवश्यक दस्तावेजों की सही जानकारी देने का काम करेंगे। इससे गलतियों और देरी की समस्या भी काफी हद तक कम हो सकेगी।
प्रमुख शहरों से होगी शुरुआत
इस नई सुविधा की शुरुआत पहले चरण में प्रदेश के बड़े शहरों से की जाएगी। इनमें लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, मेरठ, आगरा, बरेली, झांसी और गोरखपुर जैसे शहर शामिल हैं। इन जगहों पर व्यवस्था लागू होने के बाद इसके परिणामों का मूल्यांकन किया जाएगा और फिर इसे अन्य शहरों तक विस्तार दिया जाएगा।

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