पीपीपी मॉडल पर होगा निर्माण
सरकार इन बस अड्डों का निर्माण पीपीपी मॉडल पर करेगी। इस मॉडल के तहत निजी कंपनियों की भागीदारी से बस स्टेशनों को आधुनिक रूप दिया जाएगा। पहले चरण में 23 बस अड्डों के लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, और अब 49 नए बस अड्डों की स्वीकृति के साथ यह परियोजना और तेजी पकड़ने वाली है।
एयरपोर्ट जैसी मिलेंगी सुविधाएं
नए बस अड्डों को पारंपरिक बस स्टैंड की तरह नहीं बल्कि एयरपोर्ट जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। यहां यात्रियों को साफ-सुथरा वेटिंग एरिया, डिजिटल टिकटिंग, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था, खानपान की आधुनिक सुविधाएं और पार्किंग जैसी सेवाएं मिलेंगी। इससे यात्रियों का सफर ज्यादा आरामदायक और सुरक्षित बनेगा।
इन जिलों को मिली खास मंजूरी
कैबिनेट ने कुछ जिलों में जमीन आवंटन से जुड़े प्रस्तावों को भी हरी झंडी दी है:
बुलंदशहर के डिबाई क्षेत्र में सिंचाई विभाग की जमीन बस अड्डे के लिए आवंटित की जाएगी।
बलरामपुर जिले के तुलसीपुर में पीडब्ल्यूडी की जमीन पर बस अड्डा बनाने की स्वीकृति दी गई।
हाथरस जिले के सिकन्दराराऊ कस्बे में कृषि विभाग की 2 हेक्टेयर जमीन बस अड्डा निर्माण के लिए मुफ्त देने की मंजूरी मिली।
यात्रियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा
इन नए बस अड्डों के निर्माण से न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। छोटे शहरों और कस्बों में व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

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