बोरों की कमी से हो रही थी परेशानी
प्रदेश में 30 मार्च से गेहूं की सरकारी खरीद शुरू हो चुकी है, लेकिन इस बार शुरुआत से ही जूट के बोरों की कमी देखने को मिल रही थी। कई क्रय केंद्रों पर बोरे न होने के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
सरकार ने निकाला नया समाधान
इस समस्या को देखते हुए सरकार ने अब राशन दुकानदारों से पुराने यानी इस्तेमाल किए गए बोरों की सीधे खरीद करने का फैसला लिया है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद खाद्य एवं रसद विभाग अब इन यूज्ड बोरों को बिना लंबी प्रक्रिया के तुरंत खरीद सकेगा।
ई-टेंडर की प्रक्रिया से मिली राहत
पहले पुराने बोरों की खरीद के लिए ई-टेंडर की प्रक्रिया अपनाई जा रही थी, जिसमें काफी समय लग रहा था। इसी देरी के कारण गेहूं खरीद प्रभावित हो रही थी। अब इस प्रक्रिया से छूट देकर सीधे खरीद का रास्ता अपनाया गया है, जिससे काम तेजी से होगा।
हजारों बोरे होंगे उपलब्ध
सरकार के इस फैसले के बाद करीब 20 से 25 हजार गांठ जूट के बोरे तुरंत उपलब्ध हो सकेंगे। इससे क्रय केंद्रों पर बोरों की कमी दूर होगी और किसानों की फसल समय पर खरीदी जा सकेगी। इन पुराने बोरों की कीमत तय करने के लिए एक समिति बनाई जाएगी। इस समिति में खाद्य विभाग के अधिकारियों के साथ भारतीय खाद्य निगम के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। यह समिति उचित दर तय करेगी ताकि खरीद प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।

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