काम के पास ही मिलेगा रहने का मौका
इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि मजदूरों को उनके कार्यस्थल के नजदीक ही रहने की सुविधा मिल सके। इसके लिए औद्योगिक क्षेत्रों में दी जाने वाली जमीन का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा आवास निर्माण के लिए आरक्षित किया जाएगा। इससे रोज लंबी दूरी तय करने की परेशानी कम होगी और समय व खर्च दोनों की बचत होगी।
किराया होगा बेहद किफायती
सरकार की इस योजना के तहत आवास का किराया आम बाजार दर से काफी कम रखा जाएगा। अनुमान है कि मजदूरों को 1000 से 1500 रुपये प्रति माह में घर मिल सकेगा, जबकि शहरों में एक साधारण कमरे का किराया 8 से 9 हजार रुपये तक होता है। ऐसे में यह योजना कम आय वर्ग के लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।
निजी क्षेत्र की भी भागीदारी
सरकार इस योजना को सफल बनाने के लिए निजी डेवलपर्स को भी शामिल करेगी। जो डेवलपर्स मजदूरों के लिए सस्ते घर बनाएंगे, उन्हें जमीन आवंटन में प्राथमिकता, नक्शा पास कराने में छूट, अन्य शुल्कों में राहत जैसी सुविधाएं दी जाएंगी। इसके अलावा स्थानीय विकास प्राधिकरणों को भी आवास निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
इन लोगों को मिलेगा लाभ
यह योजना केवल मजदूरों तक सीमित नहीं होगी। इसके दायरे में दिहाड़ी मजदूर, रेहड़ी-पटरी विक्रेता, पेंटर, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन, अन्य असंगठित क्षेत्र के कामगार भी शामिल होंगे। आवंटन व्यवस्था ऐसी होगी कि जरूरत के अनुसार लोग इन घरों का उपयोग कर सकें। यह योजना खासतौर पर नोएडा, गाजियाबाद और लखनऊ जैसे बड़े शहरों में काम करने वाले लोगों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है, जहां किराया सबसे बड़ी समस्या बना हुआ है।

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