बढ़ती मांग और सीमित उत्पादन
भारत में रासायनिक उर्वरकों में यूरिया की खपत सबसे ज्यादा होती है। हर साल इसकी मांग बहुत बड़ी मात्रा में होती है, लेकिन घरेलू उत्पादन इस जरूरत को पूरी तरह पूरा नहीं कर पाता। ऐसे में देश को बड़ी मात्रा में यूरिया विदेशों से मंगवाना पड़ता है, ताकि खेती का काम प्रभावित न हो।
आयात पर बढ़ती निर्भरता
भारत लंबे समय से यूरिया के लिए विदेशों पर निर्भर रहा है। खासतौर पर मध्य-पूर्व के देश जैसे ओमान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात भारत के प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। लेकिन हाल के वैश्विक तनाव और समुद्री मार्गों में बाधा के कारण आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है।
महंगी कीमत पर खरीद का फैसला
बदलते हालात में सरकार को यूरिया की खरीद पहले की तुलना में कहीं ज्यादा कीमत पर करनी पड़ रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम बढ़ने और आपूर्ति में रुकावट के कारण भारत को मजबूरी में ऊंची दरों पर सौदे करने पड़े हैं। इसके बावजूद सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि किसानों तक खाद की आपूर्ति प्रभावित न हो।
सरकार के कदम से किसानों के लिए राहत
हालांकि सरकार को अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है, लेकिन इसका बोझ सीधे किसानों पर नहीं डाला जा रहा। किसानों को अब भी सब्सिडी दरों पर ही यूरिया उपलब्ध कराया जाएगा। इसका मतलब है कि किसानों को महंगे दामों का असर नहीं झेलना पड़ेगा और वे समय पर बुवाई कर सकेंगे।
0 comments:
Post a Comment