शासन स्तर पर शुरू हुई कार्रवाई
हाईकोर्ट के आदेश के बाद शिक्षा विभाग ने मंडल स्तर पर प्रक्रिया तेज कर दी है। सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जिला विद्यालय निरीक्षकों से तुरंत आवश्यक प्रस्ताव मंगवाएं। इसके लिए संयुक्त शिक्षा निदेशक ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश दिए हैं।
समान काम तो समान वेतन
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा है कि यदि कोई शिक्षक वास्तविक रूप से प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी निभा रहा है, तो उसे उसी पद के अनुरूप वेतन मिलना चाहिए। कोर्ट के अनुसार प्रमाणित कार्यवाहक प्रधानाचार्य को समान वेतन लाभ मिलेगा, तीन माह बाद से नियमित वेतनमान लागू होगा। यह लाभ नियुक्ति या सेवानिवृत्ति तक जारी रहेगा
शासन की सख्ती के बाद बढ़ी गति
शासन ने पहले आदेश जारी किए थे, लेकिन जिलों में प्रक्रिया धीमी चल रही थी। इसके बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को चेतावनी दी है कि देरी करने पर कार्रवाई तय होगी। इसी के बाद अब फाइलें तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
शिक्षक संगठनों ने फैसले का स्वागत किया
माध्यमिक शिक्षक संघ ने इस फैसले को राहतकारी बताया है। संगठन के अनुसार, यह निर्णय उन हजारों शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण है जो वर्षों से प्रधानाचार्य का कार्य कर रहे थे, लेकिन उन्हें उसका पूरा वेतन नहीं मिल पा रहा था।
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