यूपी में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ेगा? सरकार के फैसले पर टिकी सबकी नजर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समय पर न हो पाने की स्थिति के चलते ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। प्रदेश भर के प्रधान संगठित होकर सरकार से अपील कर रहे हैं कि मौजूदा व्यवस्था में बदलाव करते हुए उन्हें ही प्रशासक के रूप में काम करने दिया जाए, ताकि गांवों का विकास प्रभावित न हो।

प्रधान संगठनों की सरकार से बड़ी मांग

राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन की हालिया बैठक में यह मांग उठी कि जब तक पंचायत चुनाव नहीं होते, तब तक वर्तमान ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया जाए। उनका कहना है कि प्रशासक नियुक्त करने से स्थानीय विकास कार्यों में रुकावट आती है और प्रशासनिक संतुलन बिगड़ता है।

प्रधानों को ही प्रशासक बनाने का सुझाव

बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि सरकार यदि चाहे तो मौजूदा ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक के रूप में काम करने का अवसर दे सकती है। इसके लिए मध्य प्रदेश और राजस्थान का उदाहरण भी सामने रखा गया, जहां सरपंचों को प्रशासक की जिम्मेदारी दी गई थी।

सरकार तक पहुंचाई जाएगी मांग

संघ भवन सभागार में आयोजित बैठक में मौजूद पूर्व आईपीएस और भाजपा शासकीय समन्वय विभाग के प्रदेश संयोजक डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला ने प्रधानों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को सरकार तक पहुंचाया जाएगा।

सुरक्षा और कानूनी पर भी चर्चा

संगठन ने ग्राम प्रधानों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। मांग की गई कि पुलिस को अलर्ट मोड पर रखा जाए और प्रधानों या उनके परिजनों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई या मुकदमा दर्ज करने से पहले पूरी जांच की जाए।

नेताओं से मुलाकात की तैयारी

प्रधान संगठन के नेताओं ने बताया कि वे जल्द ही उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और पंचायती राज मंत्री से मुलाकात करेंगे। इससे पहले उन्होंने उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक को भी अपनी मांगों से अवगत कराया है।

चुनाव और कानूनी स्थिति

गौरतलब है कि ग्राम पंचायतों का मौजूदा कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है, जबकि राज्य निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची का प्रकाशन 10 जून को प्रस्तावित है। इसी बीच पंचायत चुनाव से जुड़ा मामला फिलहाल इलाहाबाद उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।

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