बिहार में दांगी और कुशवाहा दो अलग जातियां: हाई कोर्ट का अहम फैसला

पटना। बिहार में पंचायत चुनाव से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में पटना हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दांगी और कुशवाहा दो अलग-अलग जातियां हैं और उनकी श्रेणियां भी भिन्न हैं। अदालत के इस फैसले से राज्य में आरक्षण व्यवस्था और चुनावी पात्रता को लेकर स्पष्टता आई है।

कोर्ट की अहम टिप्पणी

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कुशवाहा (कोइरी) जाति अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में आती है, जबकि दांगी जाति को बिहार में अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) में शामिल किया गया है। इस आधार पर अदालत ने साफ किया कि EBC के लिए आरक्षित सीट पर OBC वर्ग का व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता।

मामला क्या था

यह मामला पश्चिम चंपारण जिले के बैरिया प्रखंड की एक ग्राम पंचायत से जुड़ा है, जहां वर्ष 2021 में हुए मुखिया चुनाव को चुनौती दी गई थी। आरोप था कि आरक्षित सीट पर गलत जाति प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लड़ा गया। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीट पर ऐसे उम्मीदवार ने जीत हासिल की, जो वास्तव में उस श्रेणी में नहीं आता।

जांच रिपोर्ट बनी आधार

राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय समिति ने जांच के बाद पाया कि संबंधित उम्मीदवार कुशवाहा (कोइरी) जाति से हैं, जो OBC श्रेणी में आती है। अदालत ने इस रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए याचिका को निराधार माना और खारिज कर दिया, साथ ही आरक्षण के नियमों को स्पष्ट रूप से लागू करने की बात कही।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर भी टिप्पणी

अदालत ने यह भी कहा कि भले ही दांगी जाति को पहले अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल किया गया था, लेकिन बिहार में बाद में इसे अत्यंत पिछड़ा वर्ग में रखा गया है। ऐसे में वर्तमान वर्गीकरण के अनुसार ही पात्रता तय होगी और ये दोनों जातियां अलग-अलग हैं।

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