अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली छूट ने बढ़ाई खरीद
जानकारों के अनुसार, रूसी तेल पर अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली अस्थायी छूट के बाद भारतीय कंपनियों ने रूस से तेल की खरीद तेज कर दी। इस छूट के तहत भारतीय रिफाइनरों को मार्च तक जहाजों पर लदे हुए दोनों प्रकार के तेल, प्रतिबंधित और गैर-प्रतिबंधित खरीदने की अनुमति दी गई थी।
मार्च में पश्चिम एशिया से आयात घटा
वहीं, मध्य-पूर्व की स्थिति में तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में आई रुकावट के कारण भारत में कच्चे तेल की सप्लाई में कमी आई। मार्च में मध्य-पूर्व से तेल आयात 14.5 करोड़ बैरल से घटकर 12.7 करोड़ बैरल रह गया। होर्मुज स्ट्रेट, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है, विश्व के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है और भारत के कुल आयात का लगभग 40-50 प्रतिशत इसी मार्ग से गुजरता है।
सऊदी और अंगोला की भूमिका
सऊदी अरब इस समय भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है, जिससे 1.75 करोड़ बैरल तेल प्राप्त हुआ। अंगोला की सप्लाई में मार्च में जबरदस्त 255 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिससे देश को मिडिल ईस्ट से कम सप्लाई की कमी को पूरा करने में मदद मिली। वहीं, इराक और UAE से तेल की सप्लाई में कमी दर्ज हुई।
रूस का बढ़ता महत्व
जानकारों का कहना है कि रूस से तेल का आयात भारत के ऊर्जा सेक्टर में स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मार्च में रूस से कच्चे तेल का हिस्सा बढ़कर 40 प्रतिशत हो गया, जिससे रिफाइनरियों की उत्पादन क्षमता और आयात संतुलन मजबूत हुआ।

0 comments:
Post a Comment