इन एग्रीजंक्शन केंद्रों को ब्लॉक और तहसील मुख्यालयों पर स्थापित किया जाएगा, ताकि किसानों को आसानी से पहुंच मिल सके। योजना की खास बात यह है कि इन केंद्रों का संचालन कृषि स्नातक युवाओं द्वारा किया जाएगा, जिससे उन्हें रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
किसानों के लिए 'वन स्टॉप सॉल्यूशन' बनेंगे केंद्र
इन केंद्रों पर किसानों को बीज, उर्वरक, कीटनाशक, जैव उत्पाद, कृषि यंत्र और सरकारी योजनाओं की जानकारी एक ही छत के नीचे मिलेगी। इसके साथ ही किसान आधुनिक कृषि तकनीक, मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरक सलाह, फसल प्रबंधन और बाजार से जुड़ी जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे।
यहीं नहीं, छोटे कृषि उपकरण किराए पर उपलब्ध होंगे, मशीनों की मरम्मत की सुविधा मिलेगी और कृषि उत्पादों की बिक्री व प्रसंस्करण की भी व्यवस्था की जाएगी। इससे किसानों की लागत घटेगी और उनकी आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी।
युवाओं के लिए सुनहरा रोजगार अवसर
इस योजना के तहत वही युवा चयनित किए जाएंगे जिन्होंने कृषि या कृषि व्यवसाय प्रबंधन में स्नातक किया हो। उनकी अधिकतम आयु 40 वर्ष तय की गई है, जबकि आरक्षित वर्ग और महिलाओं को आयु सीमा में छूट दी जाएगी।
चयन प्रक्रिया जिला स्तर पर समिति द्वारा पारदर्शी तरीके से की जाएगी। चयनित युवाओं को 13 दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें कृषि व्यवसाय, तकनीकी ज्ञान और प्रबंधन की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ही ऋण और केंद्र स्थापना की प्रक्रिया शुरू होगी।
आर्थिक सहायता और निवेश
प्रत्येक एग्रीजंक्शन केंद्र की लागत लगभग 4.22 लाख रुपये तय की गई है। इसमें 3.5 लाख रुपये तक बैंक ऋण दिया जाएगा, जिस पर सरकार की ओर से 7.5 प्रतिशत ब्याज अनुदान मिलेगा। इसके अलावा पहले वर्ष किराए और प्रशिक्षण के लिए भी वित्तीय सहायता दी जाएगी।
सरकार ने इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का लक्ष्य रखा है। जून तक प्रचार-प्रसार, जुलाई तक लाभार्थियों का चयन, अगस्त तक प्रशिक्षण और अक्टूबर तक केंद्रों की स्थापना पूरी करने की योजना है। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी जिला और मंडल स्तर के कृषि अधिकारियों द्वारा की जाएगी।

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