इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन की वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2026 के अनुसार, वर्ष 2024 में प्रवासी भारतीयों ने लगभग 137 बिलियन डॉलर (करीब 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक) भारत भेजे। यह आंकड़ा न सिर्फ अब तक का सबसे बड़ा है, बल्कि भारत को दुनिया में रेमिटेंस प्राप्त करने वाले देशों की सूची में मजबूती से पहले स्थान पर बनाए हुए है।
एक दशक से कायम है दबदबा
भारत पिछले 10 वर्षों से इस सूची में शीर्ष पर बना हुआ है। खास बात यह है कि भारत दुनिया का पहला ऐसा देश बन चुका है, जिसने रेमिटेंस के मामले में 100 बिलियन डॉलर का आंकड़ा पार किया है। यह उपलब्धि देश की वैश्विक उपस्थिति और प्रवासी भारतीयों की आर्थिक क्षमता को दर्शाती है।
दूसरे देशों से काफी आगे
रेमिटेंस प्राप्त करने वाले देशों की सूची में भारत के बाद मेक्सिको दूसरे स्थान पर है, जबकि फिलीपींस और फ्रांस क्रमशः तीसरे और चौथे स्थान पर हैं। हालांकि, भारत और अन्य देशों के बीच का अंतर इतना बड़ा है कि प्रतिस्पर्धा फिलहाल दूर-दूर तक नजर नहीं आती।
लगातार बढ़ता ग्राफ
अगर पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2010 में भारत को लगभग 53 बिलियन डॉलर का रेमिटेंस मिला था। यह आंकड़ा 2015 में करीब 69 बिलियन डॉलर और 2020 में 83 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। लेकिन पिछले चार वर्षों में इसमें तेजी से वृद्धि हुई है, जो वैश्विक स्तर पर भारतीयों की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है।

0 comments:
Post a Comment