दरअसल, सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने जून महीने के लिए एशियाई बाजारों में अपने कच्चे तेल के दाम घटा दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स, खासकर रॉयटर्स के अनुसार, अरब लाइट कच्चे तेल का प्रीमियम 19.50 डॉलर प्रति बैरल से घटाकर 15.50 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है।
वैश्विक तनाव के बीच बड़ा रणनीतिक कदम
यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्गों पर तनाव बना हुआ है। इस क्षेत्र से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल सप्लाई होती है, इसलिए किसी भी तरह की बाधा सीधे कीमतों को प्रभावित करती है। बावजूद इसके, सऊदी अरब ने कीमतों में नरमी दिखाकर बाजार को संतुलित करने का संकेत दिया है।
अलग-अलग बाजारों के लिए अलग कीमतें
सऊदी अरामको ने विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग दरें तय की हैं। एशिया के लिए कीमतों में कटौती की गई है। नॉर्थवेस्ट यूरोप के लिए अरब लाइट का प्रीमियम ICE Brent के मुकाबले घटाया गया। वहीं, नॉर्थ अमेरिका के लिए कीमतें लगभग स्थिर रखी गई हैं। इससे साफ है कि सऊदी अरब अपने प्रमुख ग्राहकों और क्षेत्रीय मांग के हिसाब से रणनीति बना रहा है।
उत्पादन बढ़ाने का भी फैसला
इसी बीच OPEC+ के सात देशों ने जून महीने में उत्पादन बढ़ाने का निर्णय लिया है। रोजाना 1.88 लाख बैरल अतिरिक्त उत्पादन का फैसला लगातार तीसरी बार हुआ है। इसका मकसद बाजार में सप्लाई बढ़ाकर कीमतों को नियंत्रित रखना है।
भारत को क्या मिलेगा फायदा?
भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 85-90% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में कीमतों में थोड़ी भी गिरावट देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डालती है। आयात बिल कम हो सकता है, पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव घट सकता है, ट्रांसपोर्ट लागत कम होने से रोजमर्रा की चीजें सस्ती हो सकती हैं और महंगाई दर को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती हैं।

0 comments:
Post a Comment