किसानों को मिलेगा अतिरिक्त फायदा
सरकार ने इस बार सिर्फ बेस प्राइस ही तय नहीं किया, बल्कि रिकवरी के आधार पर अतिरिक्त लाभ की व्यवस्था भी की है। यदि चीनी मिलों में गन्ने से चीनी की रिकवरी 10.25% से अधिक होती है, तो हर 0.1% वृद्धि पर किसानों को 3.56 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त भुगतान मिलेगा। वहीं, रिकवरी कम होने की स्थिति में इसी अनुपात में कटौती की जाएगी। हालांकि, 9.5% से कम रिकवरी वाली मिलों के लिए भी किसानों के हितों को सुरक्षित रखते हुए न्यूनतम 338.3 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान सुनिश्चित किया गया है।
लागत से काफी अधिक मूल्य
सरकार के मुताबिक, 2026-27 सीजन के लिए गन्ने की औसत उत्पादन लागत करीब 182 रुपये प्रति क्विंटल आंकी गई है। ऐसे में 365 रुपये का FRP लागत से लगभग 100% अधिक है। यह बढ़ोतरी किसानों की आय को मजबूत करने और कृषि को लाभकारी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। पिछले सीजन की तुलना में यह मूल्य लगभग 2.8% ज्यादा है।
करोड़ों लोगों की आजीविका
गन्ना और चीनी उद्योग भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ है। देश में करीब 5 करोड़ किसान और उनके परिवार इस फसल पर निर्भर हैं। इसके अलावा, चीनी मिलों में काम करने वाले लगभग 5 लाख श्रमिकों को सीधे रोजगार मिलता है, जबकि परिवहन, व्यापार और अन्य सहायक क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में लोगों की रोजी-रोटी इसी उद्योग से जुड़ी है।

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