रेल कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले: केंद्र सरकार ने दी 3 बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। रेल कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार ने एक अहम राहत देने वाला फैसला लागू किया है। रेल मंत्रालय ने कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा से जुड़ी चिल्ड्रंस एजुकेशन अलाउंस (CEA) और हॉस्टल सब्सिडी योजना में संशोधन करते हुए वित्तीय सहायता की राशि बढ़ा दी है। इससे उन कर्मचारियों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा, जिनके बच्चे घर से दूर हॉस्टल या आवासीय विद्यालयों में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं।

DA बढ़ने का मिला सीधा फायदा

रेलवे के नियमों के अनुसार जब महंगाई भत्ता (DA) तय सीमा से ऊपर पहुंचता है, तो उससे जुड़े कई भत्तों की राशि भी स्वतः संशोधित हो जाती है। वर्तमान में DA 50 प्रतिशत से अधिक होने के बाद हॉस्टल सब्सिडी की नई दर ₹8,437.50 प्रति माह प्रति बच्चा निर्धारित कर दी गई है। इससे कर्मचारियों को बच्चों की शिक्षा पर होने वाले खर्च में पहले की तुलना में अधिक आर्थिक सहायता मिलेगी।

तय राशि के अनुसार मिलेगा भुगतान

नई व्यवस्था की खास बात यह है कि सब्सिडी का भुगतान वास्तविक हॉस्टल फीस के आधार पर नहीं, बल्कि सरकार द्वारा निर्धारित निश्चित दर के अनुसार किया जाएगा। यानी हॉस्टल का खर्च कम हो या अधिक, पात्र कर्मचारी को ₹8,437.50 प्रति माह की निर्धारित सहायता ही मिलेगी। यह सुविधा केवल सेवारत रेलवे कर्मचारियों के लिए लागू होगी और अधिकतम दो बच्चों तक इसका लाभ दिया जाएगा।

किन कक्षाओं के छात्रों को मिलेगा लाभ?

यह योजना केवल स्कूली शिक्षा तक सीमित नहीं है। रेल मंत्रालय के अनुसार नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक पढ़ने वाले बच्चों के लिए यह सुविधा उपलब्ध रहेगी। इसके अलावा, यदि कोई छात्र 10वीं के बाद आईटीआई, पॉलिटेक्निक या इंजीनियरिंग डिप्लोमा जैसे तकनीकी पाठ्यक्रम में प्रवेश लेता है, तो ऐसे कोर्स के शुरुआती दो वर्षों के लिए भी हॉस्टल सब्सिडी का लाभ लिया जा सकेगा।

एक बच्चे पर एक ही योजना का लाभ

रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि एक ही बच्चे के लिए चिल्ड्रंस एजुकेशन अलाउंस (CEA) और हॉस्टल सब्सिडी दोनों का लाभ एक साथ नहीं मिलेगा। यदि बच्चा हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहा है, तो उसके लिए केवल हॉस्टल सब्सिडी ही देय होगी। वहीं इस राशि का दावा सामान्य रूप से साल में एक बार, शैक्षणिक सत्र समाप्त होने के बाद किया जाएगा।

दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष प्रावधान

रेल मंत्रालय ने दिव्यांग बच्चों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्था भी जारी रखी है। ऐसे मामलों में शिक्षा भत्ते की दरें सामान्य श्रेणी की तुलना में अधिक निर्धारित की गई हैं, ताकि विशेष जरूरत वाले बच्चों की पढ़ाई पर आर्थिक बोझ कम किया जा सके।

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